बेगूसराय: बिहार की राजनीति से जुड़ा एक बहुचर्चित मामला आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गया। पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को आर्म्स एक्ट के मामले में बेगूसराय की MP-MLA स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 7 साल की सजा सुनाई है।
यह फैसला एमपी-एमएलए कोर्ट के जज बृजेश कुमार सिंह ने सुनाया। अदालत ने दोनों को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-A) के तहत 7 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास होगा। इसके अलावा धारा 26 के तहत 5 साल की सजा और 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
2018 के छापेमारी से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2018 का है, जब मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच के दौरान सीबीआई ने बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र के श्रीपुर अर्जुन टोला स्थित मंजू वर्मा के पैतृक आवास पर छापेमारी की थी।
छापेमारी के दौरान एक बंद कमरे में रखे बॉक्स से कुल 50 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। इनमें .323 बोर, 8 एमएम, 7.62 और .303 बोर के कारतूस शामिल थे। इसके बाद सीबीआई के डीएसपी उमेश प्रसाद के बयान पर चेरियाबरियारपुर थाना में कांड संख्या 143/2018 के तहत आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज किया गया था।
8 साल बाद आया फैसला, 7 गवाहों की हुई गवाही
इस बहुचर्चित केस में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 7 गवाह पेश किए गए। लंबी सुनवाई और बहस के बाद आखिरकार करीब 8 साल बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
लोक अभियोजक संतोष कुमार ने बताया कि अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सख्त सजा सुनाई है।
तत्काल न्यायिक हिरासत में भेजा गया
फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत ने मंजू वर्मा और उनके पति को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेजने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि छापेमारी के समय मंजू वर्मा बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री थीं। वर्तमान में उनके पुत्र अभिषेक आनंद चेरिया बरियारपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।
यह मामला बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा और अब कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
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