रांची: झारखंड के सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। ट्रेजरी घोटाले की जांच कर रही सीआईडी ने निलंबित प्रधान लिपिक मुनींद्र कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में सामने आई कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है—जहां फर्जी पहचान बनाई गई, डिजिटल सिस्टम को चकमा दिया गया और सरकारी पैसे को निजी खातों तक पहुंचाया गया।
सीआईडी के मुताबिक, पशुपालन विभाग में लेखापाल के पद पर रहते हुए मुनींद्र कुमार ने कुबेर पोर्टल की तकनीकी खामियों का फायदा उठाया। आरोप है कि उसने खुद के साथ-साथ अपने सहयोगियों, रिटायर और मृत कर्मचारियों के नाम पर भी फर्जी टेम्परेरी आईडी तैयार कर ली।
इन फर्जी आईडी के जरिए सरकारी बिल तैयार किए गए और उन्हें ट्रेजरी से पास करवाकर रकम अपने और करीबियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई।
मृत और रिटायर कर्मचारियों के नाम पर भी ‘डिजिटल खेल’
सीआईडी की जांच में दावा किया गया है कि आरोपी ने ऐसे लोगों के नाम का इस्तेमाल किया जो या तो विभाग से रिटायर हो चुके थे या जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। उनके नाम पर बनाई गई फर्जी आईडी के जरिए भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया।
अपने खाते में पहुंचाए लाखों रुपये
जांच के अनुसार, मुनींद्र कुमार ने अपने बैंक खातों में ही करीब 1.52 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी की। वहीं पूरे मामले में सरकारी राशि की अवैध निकासी का आंकड़ा 3 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया जा रहा है।
तीन थानों में दर्ज हैं मामले
इस घोटाले को लेकर आरोपी के खिलाफ रांची के कोतवाली थाना, खेलगांव थाना और रामगढ़ थाना में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब सीआईडी इस बात की जांच कर रही है कि इस डिजिटल फर्जीवाड़े में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे।
सवाल सिस्टम पर भी
यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी की गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी डिजिटल भुगतान व्यवस्था की निगरानी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर फर्जी आईडी कैसे बनी? बिलों को मंजूरी कैसे मिली? और करोड़ों रुपये की निकासी तक सिस्टम को भनक क्यों नहीं लगी?
सीआईडी की जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।
सरकारी खजाने की सुरक्षा के बीच हुआ यह ‘कुबेर पोर्टल कांड’ अब झारखंड के सबसे चर्चित वित्तीय घोटालों में शामिल हो गया है।
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