रांची: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के बीच एक बार फिर चिंता की लहर दौड़ गई है। वजह है झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल। इस बार सवाल सड़क से नहीं, बल्कि आयोग के अंदर से उठे हैं।
JPSC के एक सदस्य ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया पर चिंता जताई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भर्ती परीक्षाओं की बेहद संवेदनशील जिम्मेदारियां एक ही निजी एजेंसी को सौंप दी गई हैं, जबकि उस एजेंसी का नाम उत्तर प्रदेश में हुई विवादित परीक्षा प्रक्रियाओं से जुड़ चुका है।
आरोप है कि टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को परीक्षा की शुरुआत से लेकर परिणाम जारी होने तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। यानी अभ्यर्थी का रजिस्ट्रेशन, आवेदन, एडमिट कार्ड, प्रश्न पत्र की छपाई, ओएमआर शीट, स्कैनिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तक की पूरी प्रक्रिया एक ही एजेंसी के हाथों में है।
‘एक एजेंसी, पूरी परीक्षा की चाबी’ पर उठे सवाल
शिकायत में कहा गया है कि पहले परीक्षा प्रणाली में कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था होती थी। अलग-अलग एजेंसियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती थीं, ताकि किसी एक जगह से पूरी प्रक्रिया प्रभावित न हो सके।
लेकिन अब आरोप है कि एक ही एजेंसी के पास परीक्षा की पूरी कमान होने से पारदर्शिता और गोपनीयता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
14वीं JPSC PT विवाद के बीच नया बवाल
JPSC पहले से ही 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर विवादों में है। अभ्यर्थियों ने कटऑफ, मूल्यांकन प्रक्रिया और वायरल ओएमआर को लेकर सवाल उठाए थे।
अब परीक्षा संचालन एजेंसी को लेकर सामने आए आरोपों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर नई बहस शुरू कर दी है।
भर्ती परीक्षा या भरोसे की परीक्षा?
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए परीक्षा सिर्फ एक पेपर नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और भविष्य का सवाल होती है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था पर उठने वाले सवाल अभ्यर्थियों के भरोसे को प्रभावित करते हैं।
अब नजर सरकार और JPSC के जवाब पर है कि आखिर एक ही एजेंसी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई और उठ रहे सवालों पर क्या सफाई दी जाती है।
JPSC विवाद अब सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि झारखंड की भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता का सवाल बनता जा रहा है।