जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया का प्रकोप तेजी से खतरनाक रूप लेता जा रहा है। 29 जून से 7 जुलाई के बीच 22,287 जांच में 1,167 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्रों को हाई अलर्ट पर रखा है, ताकि संक्रमण शहर तक फैलने से रोका जा सके।
सबसे ज्यादा चिंता ब्रेन मलेरिया को लेकर है। जिले में अब तक 5 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 से अधिक मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है। करीब 1,059 मरीज अस्पतालों में इलाजरत हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है।
जमशेदपुर के पोटका, मुसाबनी और डुमरिया क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। पोटका में चार बच्चों की मौत के बाद गांवों में दहशत का माहौल है। सैकड़ों गांव इस बीमारी की चपेट में हैं, और कई जगहों पर लोग डर के कारण घरों में सिमट गए हैं। जुगसलाई, चाकुलिया और शहरी इलाकों में भी संक्रमण फैलने लगा है।
स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष जांच अभियान तेज कर दिया है। गांव-गांव जांच, दवा का छिड़काव और घर-घर सर्वे किया जा रहा है। एमजीएम अस्पताल के 125 डॉक्टरों की टीम चार प्रखंडों में तैनात है, जबकि केंद्रीय टीम भी निगरानी कर रही है।
डॉक्टरों के अनुसार मलेरिया के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो रहा है। तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, उल्टी और कमजोरी इसके मुख्य लक्षण हैं। वहीं ब्रेन मलेरिया में बेहोशी, दौरे, मानसिक भ्रम और सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर संकेत सामने आते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरी दवा लेना जरूरी है, इलाज बीच में छोड़ना खतरनाक हो सकता है।
बचाव के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल, साफ-सफाई, पानी जमा न होने देना और पूरी बाजू के कपड़े पहनना जरूरी बताया गया है।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लापरवाही ही मौत की बड़ी वजह बन रही है। कई लोग शुरुआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देते और जब हालत बिगड़ती है तब अस्पताल पहुंचते हैं। आने वाले दिनों में मामलों के और बढ़ने की आशंका जताई गई है।
उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा है कि पूरा स्वास्थ्य महकमा इस बीमारी की रोकथाम में जुटा हुआ है और लोगों से अपील की गई है कि किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
स्थिति साफ संकेत दे रही है कि अगर समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई, तो यह प्रकोप और भी गंभीर रूप ले सकता है।
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