रांची: रांची से बड़ी खबर सामने आई है, जहां झारखंड सरकार ने विश्वविद्यालयों के कामकाज में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर ली है। नए नियमों के तहत अब कुलपतियों (VC) के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों में कटौती कर दी गई है। स्थिति यह हो गई है कि अब कुलपति चपरासी तक की नियुक्ति अपने स्तर से नहीं कर पाएंगे।
राज्य सरकार ने “स्टैच्यूट्स फॉर फाइनेंस एंड अकाउंट मैनेजमेंट इन स्टेट यूनिवर्सिटीज ऑफ झारखंड-2026” का मसौदा तैयार किया है। इसके तहत पहली बार विश्वविद्यालयों के लिए अलग प्रोक्योरमेंट मैनुअल और मैनपावर प्रोक्योरमेंट (आउटसोर्सिंग) मैनुअल लागू किया जाएगा।
अब तक विश्वविद्यालयों में कुलपति को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी नियुक्ति, संविदा बहाली, आउटसोर्सिंग और वित्तीय स्वीकृति जैसे अधिकार प्राप्त थे। अलग-अलग विश्वविद्यालय अपने तरीके से खरीद और बहाली की प्रक्रिया अपनाते थे। लेकिन अब यह पूरी व्यवस्था एक समान नियमों के तहत चलेगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी प्रकार की नियुक्ति मैनपावर प्रोक्योरमेंट मैनुअल के तहत ही होगी। वहीं कंप्यूटर, लैब उपकरण, फर्नीचर, किताबें या किसी भी सामग्री की खरीद से पहले आवश्यकता का आकलन किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज होगी। बिना तय प्रक्रिया के कोई खरीद या भुगतान संभव नहीं होगा।
आउटसोर्सिंग के मामलों में भी अब सीधे किसी एजेंसी को काम देने की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। इसके लिए राज्य सरकार के अधिकृत ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से ही एजेंसियों का चयन होगा। हर स्तर पर तकनीकी मूल्यांकन, गुणवत्ता जांच और सत्यापन के बाद ही भुगतान किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता लाना, वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाना और सभी संस्थानों में एक समान व्यवस्था लागू करना है।
इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में मनमानी की गुंजाइश कम होगी और हर निर्णय का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे जवाबदेही भी तय होगी।
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