शेखोपुरसराय (शेखपुरा): शेखोपुरसराय नगर पंचायत इन दिनों बदहाली की ऐसी तस्वीर बन चुका है, जहां लापरवाही और सिस्टम की नाकामी खुलकर सामने आ रही है। करीब तीन महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज़ सफाई कर्मियों ने हड़ताल का रास्ता चुना, और अब पिछले छह दिनों से पूरे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है।
नतीजा—हर गली, हर मोहल्ला कूड़े के ढेर में तब्दील। नालियों में सड़ता कचरा, सड़कों पर फैली गंदगी और भीषण गर्मी में उठती दुर्गंध ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। यह सिर्फ गंदगी का मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर स्वास्थ्य आपदा को न्योता है। डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से मंडरा रहा है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—जब जनता से हर साल सफाई के नाम पर टैक्स वसूला जाता है, तो आखिर वह पैसा जा कहां रहा है?
क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर सिस्टम की ऐसी विफलता, जहां कर्मचारियों को उनका हक तक नहीं मिल पा रहा? अगर सफाई कर्मियों को वेतन ही नहीं मिलेगा, तो शहर साफ कैसे रहेगा?
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। राहगीर परेशान हैं, दुकानदार बदबू से जूझ रहे हैं, और आम जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। लेकिन नगर पंचायत के जिम्मेदारों की चुप्पी हालात को और गंभीर बना रही है। न कोई ठोस कदम, न कोई स्पष्ट जवाब—जैसे सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया गया हो।
क्या प्रशासन किसी बड़ी बीमारी या महामारी का इंतजार कर रहा है?
अब सीधे सवाल उठ रहे हैं—
क्या बकाया वेतन जल्द जारी होगा?
क्या सफाई व्यवस्था बहाल की जाएगी?
या फिर शेखोपुर सराय के लोगों को इसी गंदगी और बदहाली में जीने के लिए छोड़ दिया जाएगा?
फिलहाल सच्चाई यही है— सिस्टम की लापरवाही का बोझ अब आम जनता अपने स्वास्थ्य और जिंदगी से चुका रही है।
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मो.सरवर आलम, शेखोपुरसराय (शेखपुरा)