लखीसराय शहर का केआरके हाई स्कूल मैदान अब खेल का मैदान कम और वाहनों का अड्डा ज्यादा बन चुका है। सुबह-शाम जहां युवाओं को दौड़ लगानी चाहिए, वहां स्कॉर्पियो, बोलेरो, टेम्पो, टोटो से लेकर ट्रैक्टर और नगर परिषद के जेसीबी तक बेधड़क दौड़ रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिस मैदान में रोज सैकड़ों महिला-पुरुष सुबह 4 बजे से लेकर रात तक वॉकिंग, एक्सरसाइज और पुलिस बहाली की तैयारी के लिए रनिंग करते हैं, वहीं भारी वाहनों की आवाजाही उनके लिए जानलेवा खतरा बन चुकी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा मैदान के इस्तेमाल के नाम पर कथित रूप से भाड़ा वसूला जा रहा है, जिसके चलते यह पूरा इलाका ‘अनौपचारिक पार्किंग जोन’ में तब्दील हो गया है। सवाल उठता है—क्या खेल मैदान अब कमाई का जरिया बन गया है?
स्थिति सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। खगौर और किऊल के खेल मैदानों का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जहां बालू से लदे भारी वाहन बेलगाम तरीके से दौड़ रहे हैं।
सिस्टम पर बड़ा सवाल:
जब मैदानों में खिलाड़ी नहीं, गाड़ियां दौड़ेंगी—तो भविष्य के खिलाड़ी कहां तैयार होंगे? और अगर किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो गया, तो जिम्मेदारी कौन लेगा?
स्थानीय युवाओं और खिलाड़ियों ने प्रशासन से मांग की है कि खेल मैदानों को तुरंत वाहनों से मुक्त कराया जाए और यहां सिर्फ खेल गतिविधियों की अनुमति दी जाए।
फिलहाल तस्वीर साफ है—मैदान पर कब्जा गाड़ियों का है… और सिस्टम अब भी खामोश है।
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