रांची: जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित धांधली की जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर रांची में चल रहा छात्रों का आंदोलन मंगलवार की आधी रात अचानक हाई-वोल्टेज मोड़ पर पहुंच गया। रात करीब एक बजे डीसी मंजूनाथ भजंत्री और एसएसपी राकेश रंजन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पर पहुंच गए। अधिकारियों के पहुंचते ही धरनास्थल पर हलचल तेज हो गई। कुछ ही देर में भाजपा के नेता भी छात्रों के समर्थन में मौके पर पहुंच गए।
आधी रात अफसर पहुंचे तो बढ़ी हलचल
धरनास्थल पर पहुंचे डीसी ने छात्रों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यदि अभ्यर्थी जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कराने की मांग कर रहे हैं, तो उन्हें इसके समर्थन में ठोस आधार और साक्ष्य प्रशासन के सामने रखने होंगे। डीसी ने छात्रों को अपने वकीलों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष पक्ष रखने की सलाह दी।
वहीं एसएसपी राकेश रंजन ने धरनास्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और छात्रों से अवांछित लोगों पर नजर रखने की अपील की।
संदिग्ध युवक को पुलिस ने लिया हिरासत में
देर रात धरनास्थल के आसपास घूम रहे आजमगढ़ के एक युवक पर पुलिस को संदेह हुआ। पूछताछ के दौरान संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पुलिस उसे हिरासत में लेकर थाने ले गई। इस घटना के बाद धरनास्थल पर मौजूद छात्रों के बीच भी चर्चा तेज हो गई।
प्रशासन पहुंचा तो BJP ने भी संभाला मोर्चा
अधिकारियों के धरनास्थल पहुंचने की खबर मिलते ही भाजपा के पूर्व मंत्री अमर बाउरी, धनबाद विधायक राज सिन्हा और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही समेत कई नेता छात्रों के समर्थन में पहुंच गए। भाजपा नेताओं ने छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को लेकर समर्थन जताया।
इस दौरान माहौल में प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक विरोध—दोनों की झलक दिखाई दी।
परीक्षा रद्द और CBI जांच पर अड़े छात्र
छात्र प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया है कि जब तक जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और मामले की सीबीआई जांच की मांग पर निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने पिछले दिनों हुए लाठीचार्ज के विरोध में मौन जुलूस भी निकाला।
छात्र नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी दी गई है।
रात का घटनाक्रम क्यों बना चर्चा का विषय?
रांची में दिनभर आंदोलन और राजनीतिक बयानबाजी के बाद रात एक बजे प्रशासन के आला अधिकारियों का सीधे धरनास्थल पहुंचना इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित पहलू रहा। एक तरफ प्रशासन छात्रों से सबूत मांग रहा है, दूसरी ओर छात्र परीक्षा रद्द कर सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच अगली बातचीत किस दिशा में जाती है।
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