मुंगेर: सावन में बाबा बैद्यनाथ की भक्ति के रंग हर कदम पर अलग नजर आ रहे हैं। कोई कठिन संकल्प के साथ देवघर की राह पकड़ रहा है तो कोई अपनी अनोखी कांवड़ से आस्था की नई तस्वीर पेश कर रहा है। मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर इन दिनों ऐसी ही एक अनोखी कांवड़ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। करीब 50 किलो वजनी कांवड़नुमा पालकी में भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र विराजमान हैं। भागलपुर से आए कांवरियों का जत्था इन तीनों देव स्वरूपों को साथ लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहा है।
कच्ची कांवरिया पथ पर जैसे ही यह अनोखी कांवड़ पहुंची, रास्ते से गुजर रहे श्रद्धालुओं की नजरें उस पर टिक गईं। कांवर में विराजमान भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के स्वरूप को देखकर कई श्रद्धालु रास्ते में रुक गए। किसी ने हाथ जोड़कर दर्शन किए तो किसी ने नतमस्तक होकर आस्था प्रकट की।
करीब 50 किलो वजन और लंबी पैदल यात्रा की चुनौती के बावजूद कांवरियों का उत्साह कम नहीं हुआ है। कांवर को संभालते हुए जत्था लगातार बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर की ओर बढ़ रहा है। इस अनोखी यात्रा में भगवान जगन्नाथ को साथ लेकर चलना कांवरियों के लिए श्रद्धा के साथ-साथ विशेष आध्यात्मिक अनुभव भी बना हुआ है।
भागलपुर के कांवरिया संजीव कुमार और उनके साथियों का कहना है कि भगवान जगन्नाथ को साथ लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम जाना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उनके मुताबिक यह सिर्फ कांवड़ यात्रा नहीं, बल्कि भगवान के प्रति समर्पण और आस्था का सफर है।
सावन के दौरान मुंगेर का कच्ची कांवरिया पथ देशभर से आने वाले शिवभक्तों की अलग-अलग आस्था का साक्षी बन रहा है। कहीं विशाल कांवड़ लोगों का ध्यान खींच रही है तो कहीं कठिन संकल्प लेकर निकले कांवरिए श्रद्धालुओं को प्रेरित कर रहे हैं। इसी कड़ी में जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र को कांवड़ में विराजमान कर देवघर ले जाने का यह अनोखा प्रयास भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
कंधे पर कांवड़, साथ में तीन देव स्वरूप और जुबां पर बाबा बैद्यनाथ का नाम—मुंगेर की कांवरिया पथ पर आस्था की यह तस्वीर सावन की भक्ति को एक अलग रंग दे रही है।
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