लखीसराय: बिहार का लखीसराय जिला अब केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेल के मैदान में भी झंडे गाड़ने के लिए तैयार हो रहा है। सरकारी स्कूलों के मैदानों में धूल फांक रही खेल सामग्रियों के दिन बहुरने वाले हैं और अब वहां से राज्य और देश को नए चैंपियन मिलेंगे।
स्कूलों में खेल संस्कृति को मजबूत करने और छुपी हुई प्रतिभाओं को तराशने के लिए जिला पदाधिकारी (DM) शैलेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में समाहरणालय में एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की गई। डीएम ने दो टूक शब्दों में कहा—“पैसे या गाइडेंस की कमी से अब जिले का कोई भी हुनरमंद खिलाड़ी पीछे नहीं छूटेगा, जिला प्रशासन हर कदम पर उनके साथ खड़ा है।”
आइए जानते हैं लखीसराय को ‘स्पोर्ट्स हब’ बनाने के लिए क्या है प्रशासन का मास्टर प्लान:
पीटी टीचर्स (शारीरिक शिक्षक) को मिला ‘टैलेंट हंटर’ का टास्क
बैठक में जिले के सभी शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल अटेंडेंस तक सीमित न रहें।
- खिलाड़ियों की खोज: हर स्कूल में अलग-अलग खेलों (जैसे कबड्डी, एथलेटिक्स, फुटबॉल आदि) में रुचि रखने वाले बच्चों की पहचान की जाएगी।
- रेगुलर ट्रेनिंग: पहचान के बाद उन प्रतिभाशाली बच्चों का सही आकलन करके उन्हें स्कूल स्तर पर ही प्रोफेशनल और नियमित ट्रेनिंग दी जाएगी।
- रखा जाएगा पूरा ध्यान: स्कूल के बजट में मौजूद खेल सामग्री का पूरा और सही इस्तेमाल बच्चों के अभ्यास के लिए सुनिश्चित करना होगा。
बनेगा ‘स्पोर्ट्स कैलेंडर’, स्कूल से लेकर राज्य स्तर तक मचेगा धमाल
अब साल भर स्कूलों में खेल की एक्टिविटीज चलती रहेंगी। इसके लिए डीएम ने हर स्कूल को अपना वार्षिक खेल कैलेंडर (Annual Sports Calendar) तैयार करने का निर्देश दिया है।
- स्कूल स्तर पर नियमित अभ्यास के बाद ‘इंटर-स्कूल’ (अंतर-विद्यालय) प्रतियोगिताएं होंगी।
- यहाँ से जो बेस्ट खिलाड़ी निकलेंगे, उन्हें जिला और राज्य स्तर की बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए प्रशासन की तरफ से स्पेशल कोचिंग दी जाएगी।
ग्राउंड पर उतरेगी अफसरों की टीम, इंफ्रास्ट्रक्चर होगा दुरुस्त
बैठक में सिर्फ कागजी बातें नहीं हुईं, बल्कि स्कूलों में मौजूद खेल मैदानों और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। जिला खेल पदाधिकारी मुकुल पंकज मणि और जिला शिक्षा पदाधिकारी यदुवंश राम को निर्देश दिया गया है कि वे आपसी तालमेल बिठाकर खेल गतिविधियों को नई रफ्तार दें।
प्रशासन का विजन साफ है—जमीनी स्तर पर खेल को बढ़ावा देकर लखीसराय की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है। अब देखना होगा कि स्कूलों के पीटी टीचर्स मैदान पर इस योजना को कितनी जल्दी अमलीजामा पहनाते हैं।
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