पटना: बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने वाहन की पहचान और नीलामी में कथित गड़बड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। गोपालगंज में शराब के साथ जब्त की गई एक स्कॉर्पियो की पहचान और नीलामी से जुड़े मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता दारोगा राजेन्द्र राम को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले में इससे पहले जिला परिवहन कार्यालय के तत्कालीन लिपिक और डाटा एंट्री ऑपरेटर की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
EOU की कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि चोरी हुई स्कॉर्पियो की सही पहचान किए बिना दूसरे रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर उसे जब्त कर नीलाम कर दिया गया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि वाहन के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ मामला
EOU के मुताबिक, इस मामले में पटना हाईकोर्ट में दायर याचिका और 4 नवंबर 2025 को पारित आदेश के आलोक में आर्थिक अपराध थाना में केस दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता राधेश्याम सिंह ने आरोप लगाया था कि उनकी चोरी हुई स्कॉर्पियो को गलत रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर जब्त कर लिया गया और बाद में उसकी नीलामी भी कर दी गई।
याचिकाकर्ता का कहना था कि वाहन की वास्तविक पहचान से जुड़े तथ्यों की सही तरीके से जांच नहीं हुई। इसके कारण उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला और उनकी गाड़ी की नीलामी कर दी गई। इन्हीं आरोपों के आधार पर मामले की जांच शुरू हुई।
2020 में शराब के साथ पकड़ी गई थी स्कॉर्पियो
मामले के अनुसार, 19 जून 2020 को गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाना की पुलिस ने एक स्कॉर्पियो से करीब 340 लीटर शराब बरामद की थी। इसके बाद संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और वाहन को जब्त कर लिया गया।
जब्त वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर BR06PD9070 दर्ज किया गया था। हालांकि, मामले में वाहन के इंजन और चेसिस नंबर के आधार पर उसका वास्तविक रजिस्ट्रेशन नंबर JH01CJ7840 बताया गया है।
आरोप है कि वाहन की सही पहचान सुनिश्चित किए बिना BR06PD9070 नंबर के आधार पर उसे अधिग्रहित कर नीलाम कर दिया गया। इसी कथित गड़बड़ी को लेकर शिकायत की गई और मामला जांच एजेंसी तक पहुंचा।
तत्कालीन अनुसंधानकर्ता दारोगा राजेन्द्र राम गिरफ्तार
EOU ने इस मामले में सिधवलिया थाना कांड के तत्कालीन अनुसंधानकर्ता राजेन्द्र राम को 8 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया। करीब 59 वर्षीय राजेन्द्र राम वर्तमान में रोहतास जिले के बघैला थाना में पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर पदस्थापित थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर कार्रवाई की गई है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
परिवहन कार्यालय के दो कर्मी भी जा चुके हैं जेल
इस मामले में कार्रवाई केवल पुलिस अधिकारी तक सीमित नहीं है। EOU ने 14 सितंबर 2026 को गोपालगंज जिला परिवहन कार्यालय के तत्कालीन लिपिक कन्हैया लाल और तत्कालीन डाटा एंट्री ऑपरेटर हैदर अली अंसारी को भी गिरफ्तार किया था। दोनों को भी जेल भेजा गया था।
इन गिरफ्तारियों से वाहन के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और नीलामी की प्रक्रिया की जांच का दायरा बढ़ गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वाहन से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर गलत जानकारी कैसे दर्ज हुई और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई किस तरह हुई।
रिकॉर्ड में गड़बड़ी की जांच जारी
EOU अब पूरे मामले की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। इसमें वाहन की वास्तविक पहचान, रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, जब्ती की प्रक्रिया और नीलामी से संबंधित दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
यह मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि यदि जांच में वाहन की पहचान और नीलामी की प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होती है, तो संबंधित दस्तावेजों और कार्रवाई की जिम्मेदारी तय करने का सवाल उठेगा। फिलहाल जांच एजेंसी की कार्रवाई जारी है और मामले में सामने आए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
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