अररिया: सरकारी विभाग में कमीशनखोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां करीब 17 लाख रुपये की मशीन सप्लाई के बाद कथित तौर पर पांच प्रतिशत कमीशन की मांग की गई। शिकायत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो तक पहुंची और फिर बिछाया गया ऐसा जाल कि उद्योग विभाग के महाप्रबंधक अनिल कुमार मंडल 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार हो गए।
शनिवार सुबह पटना से पहुंची निगरानी की टीम ने शिवपुरी स्थित उनके किराये के आवास पर कार्रवाई की। बताया गया कि मशीन सप्लायर के हाथों से रकम लेने के बाद जैसे ही महाप्रबंधक ने उसे अलमारी में रखा, निगरानी की टीम ने धावा बोल दिया।
17 लाख की सप्लाई, 5 फीसदी कमीशन का हिसाब
निगरानी विभाग के डीएसपी सतीश चंद्र माधव के अनुसार, अररिया के बनगामा निवासी मशीन सप्लायर कमरे आलम ने करीब 17 लाख रुपये की मशीन की आपूर्ति की थी।
आरोप है कि इसके एवज में महाप्रबंधक की ओर से पांच प्रतिशत कमीशन के रूप में 85 हजार रुपये की मांग की गई। सप्लायर ने मामले की शिकायत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से की।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम ने आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन में आरोप सही पाए जाने के बाद 7 अगस्त को निगरानी थाने में मामला दर्ज किया गया और कार्रवाई के लिए विशेष धावा दल का गठन किया गया।
50 हजार लेकर पहुंचा सप्लायर, अलमारी तक पहुंचते ही टीम ने मारा छापा
निगरानी के निर्देश पर मशीन सप्लायर 50 हजार रुपये लेकर महाप्रबंधक के शिवपुरी स्थित आवास पहुंचा। आरोप के मुताबिक, अनिल कुमार मंडल ने रकम ली और उसे अलमारी में रख दिया।
इसी दौरान पहले से तैयार निगरानी टीम ने घर में प्रवेश कर कार्रवाई की। अलमारी से 50 हजार रुपये बरामद किए गए और महाप्रबंधक को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
डेढ़ महीने पहले ही दोबारा अररिया में हुई थी पोस्टिंग
अनिल कुमार मंडल पहले भी अररिया में उद्योग विभाग के महाप्रबंधक रह चुके हैं। वर्ष 2018 से 2022 तक उन्होंने इसी जिले में पद संभाला था।
तबादले के बाद करीब डेढ़ महीने पहले ही उनकी दोबारा अररिया में पोस्टिंग हुई थी। उन्होंने 26 जून को महाप्रबंधक के रूप में योगदान दिया था और कुछ ही समय बाद रिश्वत के आरोप में निगरानी के हत्थे चढ़ गए।
गिरफ्तारी के बाद पटना ले गई निगरानी टीम
रिश्वत की रकम बरामद करने के बाद निगरानी टीम ने गिरफ्तार महाप्रबंधक को अपने साथ पटना ले गई। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
अब जांच में यह भी सामने आने की उम्मीद है कि कथित पांच प्रतिशत कमीशन की मांग केवल इसी सप्लाई तक सीमित थी या विभाग में इस तरह की कोई और शिकायत अथवा लेन-देन भी हुआ था।
एक मशीन सप्लाई, पांच फीसदी कमीशन की मांग और निगरानी का जाल—अररिया में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी कामकाज में कथित कमीशनखोरी पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: दो अफवाहों ने हिलाया तेजस्वी का सियासी किला? राजद का पूरा संगठन भंग, अब ‘रीसेट’ की तैयारी!