पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ा राजनीतिक संकट उभरकर सामने आया है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की चुनावी हार के महज 14 दिन बाद ही संगठन में बगावत की स्थिति बन गई है।
18 मई को 19 लोकसभा सांसदों ने स्पीकर को पत्र भेजकर अलग संसदीय गुट बनाने की मांग की थी। इस पत्र का हस्ताक्षर वाला हिस्सा अब सार्वजनिक हुआ है। इसमें यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, दीपक अधिकारी (देव), माला रॉय और रचना बनर्जी सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में TMC के कुल 28 सांसदों में से लगभग 20 सांसद बागी गुट के साथ बताए जा रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर असंतोष चुनाव परिणाम के तुरंत बाद ही शुरू हो गया था।
इससे पहले 3 जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया था, जब 80 में से 58 विधायकों ने अलग गुट बनाकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा। अध्यक्ष द्वारा इस गुट को मान्यता भी दे दी गई। बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना है।
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत, यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक या सांसद अलग गुट बनाते हैं, तो उन्हें मान्यता मिल सकती है। मौजूदा स्थिति में बागी खेमे के पास आवश्यक संख्या होने का दावा किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब कानूनी और संवैधानिक स्तर पर पहुंचेगा। ममता बनर्जी का गुट इस घटनाक्रम को अदालत में चुनौती दे सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की स्थिति महाराष्ट्र (2022) जैसी हो सकती है, जहां दल के भीतर बगावत के बाद सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल गए थे।
ताजा घटनाक्रम के बाद TMC की स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है। विधानसभा में 80 में से केवल 22 विधायक शेष बताए जा रहे हैं, जबकि लोकसभा में भी पार्टी के पास सीमित संख्या में सांसद बचे हैं। राज्यसभा में भी हाल के दिनों में इस्तीफों का सिलसिला जारी है।
इस बीच, TMC सांसद कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया है कि बगावत के पीछे भारतीय जनता पार्टी की भूमिका है और बागी नेताओं पर दबाव बनाया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम का असर राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक नेतृत्व किसके पास रहेगा और पार्टी इस संकट से कैसे उबरेगी।
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