शेखोपुरसराय (शेखपुरा): शेखोपुरसराय की सड़कों पर चलने वाले टोटो अब सिर्फ यात्रियों का बोझ नहीं ढो रहे… बल्कि सिस्टम की मनमानी का भार भी उठा रहे हैं।
नगर पंचायत की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट बंदोबस्ती और पारदर्शी प्रक्रिया के वर्ष 2026 के नाम पर टोटो चालकों से जबरन अधिक शुल्क वसूला जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि नवादा और बिहार शरीफ जैसे बड़े शहरों में जहां शुल्क निर्धारित और नियंत्रित है, वहीं एक छोटे से नगर पंचायत क्षेत्र में चालकों से ज्यादा वसूली की जा रही है। सवाल उठता है—क्या नियम सिर्फ फाइलों में ही जिंदा हैं?
टोटो चालक कारू पासवान और कमलेश कुमार ने साफ आरोप लगाया है कि टेंडर लेने वाले पक्ष द्वारा खुलेआम मनमानी की जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नगर पंचायत को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर यह सब उसकी मौन सहमति से हो रहा है?
इस मामले पर कार्यपालक पदाधिकारी राकेश कुमार का कहना है कि शुल्क विभागीय आदेश के अनुसार वसूला जा रहा है, लेकिन इसे कम करना बोर्ड के अधिकार में है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अवैध वसूली के प्रमाण मिलते हैं तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 28 अप्रैल को बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी होने की बात भी कही गई है।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। फिलहाल टोटो चालक शांत जरूर हैं, लेकिन अंदर ही अंदर गुस्सा उबल रहा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह आक्रोश सड़कों पर उतर सकता है।
अब सवाल सिर्फ टोटो चालकों का नहीं… सिस्टम की जवाबदेही का है। आखिर कब तक आम लोग ‘नियमों’ के नाम पर इस तरह की वसूली सहते रहेंगे?
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मो.सरवर आलम, शेखोपुरसराय (शेखपुरा):