लखीसराय: सिनेयात्रा के तत्वावधान में लखीसराय संग्रहालय ऑडिटोरियम में आयोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रम “बिहार की सिनेयात्रा : रजतपट की विरासत” का प्रथम दिवस गौरव, आत्मीयता और सांस्कृतिक चेतना से सराबोर रहा। देश-विदेश से दर्शक ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े। कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ।

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प्रथम सत्र में लखीसराय के प्रसिद्ध चिकित्सक दंपति स्वर्गीय डॉ. श्याम सुंदर प्रसाद सिंह एवं डॉ. राजकिशोरी सिंह को उनके सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए मरणोपरांत “सिनेयात्रा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया। सम्मान उनके पुत्र एवं अशोक धाम ट्रस्ट के सचिव डॉ. कुमार अमित, पुत्रवधू डॉ. रूपा सिंह, पुत्री डॉ. हरिप्रिया और दामाद डॉ. प्रभात कुमार ने ग्रहण किया। लंदन से सुपुत्र सुमित कुमार ऑनलाइन जुड़े।

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सम्मान स्वरूप 21 हजार रुपये की नगद राशि, स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इस सम्मान की घोषणा स्वर्गीय डॉ. सिंह की द्वितीय पुण्यतिथि पर सिनेयात्रा के संस्थापक सचिव रविराज पटेल ने की थी।

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कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र, हाउस ऑफ वेराइटी के सचिव एवं रीजेंट सिनेमा के स्वामी सुमन सिन्हा, जिला कला संस्कृति पदाधिकारी सह संग्रहालय अध्यक्ष मृणाल रंजन तथा रविराज पटेल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

‘भैया’ के प्रदर्शन से लौटी मगही सिनेमा की स्मृतियां
द्वितीय सत्र में भारत की पहली मगही फिल्म भैया का विशेष प्रदर्शन हुआ। रविराज पटेल ने बताया कि यह बिहार की क्षेत्रीय भाषा में बनी पहली फिल्म थी, जबकि पहली भोजपुरी फिल्म 1963 में प्रदर्शित हुई थी।
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फिल्म के लेखक-निर्देशक फणी मजूमदार थे। इसमें तरुण बोस, विजया चौधरी और अचला सचदेव ने प्रभावशाली अभिनय किया। संगीत चित्रगुप्त का था, जबकि गीतों में विन्द्यवासिनी देवी और प्रेम धवन का योगदान रहा। “सूपवे नरियरवे” जैसे छठ गीत को लता मंगेशकर, आशा भोंसले, मोहम्मद रफ़ी और मन्ना डे ने स्वर दिया।

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फिल्म प्रदर्शन के दौरान दर्शक अपनी मातृभाषा मगही में बनी पहली फिल्म को बड़े पर्दे पर देखकर भावुक हो उठे। सभागार तालियों से गूंज उठा।

विशिष्ट उपस्थिति
इस अवसर पर मृणाल रंजन (जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी), 20 सूत्री जिला उपाध्यक्ष दीपक कुमार, डॉ. विनीता सिन्हा, डॉ. सीता देवी, डॉ. सीताराम सिंह, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंघानिया, डॉ. प्रवीण कुमार सिन्हा, राजेंद्र सिंघानिया तथा डॉ. आर.एन. दास (ऑनलाइन) सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम ने क्षेत्रीय सिनेमा की गौरवशाली विरासत को पुनर्जीवित करने का सशक्त संदेश दिया और लखीसराय को सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान दी।
