शेखपुरा: बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और बाल अपराधों से सुरक्षा के लिए शेखपुरा जिले में चलाए जा रहे ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत शनिवार को न्यायिक पदाधिकारियों ने विभिन्न विद्यालयों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उन्हें बाल अधिकारों, न्यायिक प्रक्रिया और बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए विशेष कानूनों की जानकारी दी। अभियान के दौरान खास तौर पर POCSO एक्ट के प्रावधानों को समझाया गया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NLSA), नई दिल्ली के निर्देश और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पटना के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शेखपुरा की ओर से 26 से 31 अक्टूबर तक जिले के 247 सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में यह अभियान चलाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार तिवारी के दिशानिर्देश में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों से परिचित कराना और उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
बच्चों को बताए गए सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े कानून
विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान न्यायिक पदाधिकारियों ने बच्चों को बाल श्रम, बाल विवाह, बाल तस्करी और यौन शोषण जैसे गंभीर मुद्दों के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए POCSO अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम सहित कई विशेष कानून बनाए गए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उनके अधिकारों का संरक्षण करना है।
बच्चों को न्यायिक प्रक्रिया की बुनियादी जानकारी भी दी गई, ताकि वे किसी परेशानी या अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में मदद लेने के तरीकों को समझ सकें। न्यायिक पदाधिकारियों ने अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका पर भी जोर दिया और कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार, विद्यालय और समाज की सजगता बेहद जरूरी है।
1098 पर सूचना देकर बच्चों को दिला सकते हैं मदद
अभियान के दौरान बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किसी बच्चे के अधिकारों का हनन होने, बाल श्रम, बाल विवाह, शोषण या असुरक्षा से जुड़ी स्थिति सामने आने पर चाइल्ड हेल्पलाइन अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क किया जा सकता है। साथ ही जरूरतमंद बच्चों को कानूनी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
सामाजिक संस्थाओं और विधिक स्वयंसेवकों ने निभाई भूमिका
इस अभियान को सफल बनाने में तटवासी समाज न्यास और जन निर्माण केंद्र के साथ पैनल अधिवक्ताओं एवं पारा विधिक स्वयंसेवकों ने सहयोग किया। इनके माध्यम से जिले के विभिन्न प्रखंडों, विद्यालयों और समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम, विधिक साक्षरता शिविर तथा बाल संरक्षण परामर्श सत्र आयोजित किए गए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से लोगों से अपील की गई कि बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की किसी भी घटना को नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति सामने आने पर तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना दें, ताकि समय रहते बच्चों को आवश्यक सहायता और संरक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
ये खबर भी पढ़े: पटना में सजेगा कबड्डी का महाकुंभ; 29 राज्यों की टीमें दिखाएंगी दम, प्रो कबड्डी के स्काउट तलाशेंगे नए सितारे!