गया: गुरुवार की शाम बोधगया का प्राचीन मठ परिसर सिर्फ दीपों से नहीं, बल्कि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं की साझा आस्था से भी रोशन नजर आया। ताइवान, थाईलैंड और जापान से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की शांति और विश्व शांति की कामना को लेकर विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन-पूजन हुआ तो दूसरी ओर बौद्ध भिक्षुओं ने अपनी परंपरा के अनुसार प्रार्थना और ध्यान किया।
एक परिसर, दो परंपराएं और एक ही प्रार्थना
आयोजन की सबसे खास तस्वीर तब बनी, जब सनातन परंपरा के वैदिक मंत्रों के साथ बौद्ध भिक्षुओं की प्रार्थना भी एक साथ गूंजती रही। ताइवान से आए श्रद्धालुओं ने बौद्ध मान्यताओं के साथ वैदिक परंपरा के अनुष्ठान को जोड़कर अपने पूर्वजों के लिए विशेष पूजा कराई।
हवन और पूजन के दौरान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया, जबकि बौद्ध भिक्षुओं ने अपनी भाषा और धार्मिक परंपरा के अनुसार प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की शांति, परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना की।

4000 दीपों ने बदल दिया पूरे परिसर का नजारा
इस आयोजन का सबसे आकर्षक दृश्य रहा करीब 4000 दीपों का प्रज्वलन। जैसे ही दीप जलाए गए, पूरा मठ परिसर रोशनी से जगमगा उठा। एक तरफ दीपों की कतारें, दूसरी तरफ मंत्रोच्चारण और प्रार्थना—पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में डूब गया।
बोधगया पहले से ही दुनिया के प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों में शामिल है। महाबोधि मंदिर परिसर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति से जुड़ा प्रमुख पवित्र स्थल माना जाता है।
पूर्वजों की शांति से विश्व शांति तक
विदेशी श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक आयोजन को केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं रखा। अनुष्ठान के दौरान पूर्वजों की शांति, सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना की गई।
बौद्ध भिक्षुओं की मौजूदगी ने आयोजन को और खास बना दिया। जापान और थाईलैंड से आए श्रद्धालुओं के साथ भिक्षुओं ने भी धार्मिक कार्यक्रम में भाग लिया और प्रार्थना की।

बोधगया ने फिर दिया ‘साथ-साथ’ का संदेश
बोधगया की खासियत ही यही है कि यहां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से बौद्ध श्रद्धालु आते हैं और विभिन्न देशों की बौद्ध परंपराओं की मौजूदगी दिखाई देती है। बिहार पर्यटन भी बोधगया को वैश्विक बौद्ध तीर्थ केंद्र के रूप में रेखांकित करता है।
गुरुवार का यह आयोजन इसी वैश्विक आध्यात्मिक पहचान में एक अलग रंग जोड़ गया—जहां जापान, थाईलैंड और ताइवान के श्रद्धालु पहुंचे, वैदिक मंत्र गूंजे, बौद्ध प्रार्थनाएं हुईं और 4000 दीपों ने पूरे परिसर को रोशनी से भर दिया।
बोधगया की धरती पर यह नजारा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अलग-अलग परंपराओं के बीच आस्था, सम्मान और सांस्कृतिक समन्वय की खूबसूरत तस्वीर बन गया।
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