भारत/नेपाल: नेपाल में बाढ़ और पहाड़ी इलाकों में बढ़ते आपदा जोखिम के बीच चीन ने नेपाल को अहम मदद का भरोसा दिया है। चीन ने घोषणा की है कि वह नेपाल को हिमतालों के जोखिम, मौसम और आपातकालीन जल विज्ञान से जुड़ी सूचनाएं लगातार उपलब्ध कराएगा। इसका मकसद संभावित प्राकृतिक आपदाओं से पहले नेपाल को जरूरी जानकारी और चेतावनी उपलब्ध कराना है।
काठमांडू स्थित चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी साझा की है। दूतावास ने चीन के जल संसाधन मंत्रालय का हवाला देते हुए बताया कि नेपाल को हिमतालों से जुड़े जोखिम, जल अवरोधों और आपातकालीन जल विज्ञान निगरानी से संबंधित सूचनाएं निरंतर उपलब्ध कराई जाएंगी।
बाढ़ के बाद चीन ने बढ़ाई निगरानी
चीन की ओर से यह आश्वासन ऐसे समय में आया है, जब नेपाल में बाढ़ और पहाड़ी इलाकों से जुड़े जोखिम लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। चीन के अनुसार, भोटेकोशी बाढ़ के बाद से ही नेपाल को मौसम निगरानी, पूर्वानुमान, पूर्व चेतावनी और बाढ़ के प्रभाव से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
यानी चीन की मदद केवल बाढ़ आने के बाद राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि मौसम और जल विज्ञान संबंधी सूचनाओं के जरिए संभावित खतरे की पहले से निगरानी करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
भोटेकोशी बाढ़ के तुरंत बाद हुई वीडियो बैठक
चीनी दूतावास के अनुसार, भोटेकोशी बाढ़ के तुरंत बाद नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के साथ वीडियो परामर्श बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में मौसम की स्थिति और बाढ़ से जुड़े जोखिमों को लेकर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया।
वहीं, चीन के चाइना मेटियोरोलॉजिकल एडमिनिस्ट्रेशन ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए नेपाल को दी जा रही मौसम संबंधी सहायता की जानकारी सार्वजनिक की।
हिमताल क्यों हैं बड़ी चिंता?
हिमालयी क्षेत्र में मौजूद हिमतालों पर विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की नजर रहती है। इन तालों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने या प्राकृतिक अवरोध टूटने की स्थिति में नीचे की ओर अचानक तेज पानी पहुंच सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
ऐसे में हिमतालों की निगरानी, मौसम का पूर्वानुमान और समय रहते चेतावनी मिलना नेपाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चीन की ओर से लगातार जानकारी उपलब्ध कराने का आश्वासन इसी आपदा जोखिम को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मौसम से लेकर बाढ़ तक, सूचना पर जोर
चीन ने स्पष्ट किया है कि नेपाल को मौसम निगरानी, पूर्वानुमान, पूर्व चेतावनी और बाढ़ के प्रभाव से जुड़ी सूचनाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही हिमतालों और आपातकालीन जल विज्ञान से जुड़ी जानकारी भी साझा करने की बात कही गई है।
इससे नेपाल की संबंधित एजेंसियों को संभावित जोखिमों को समझने, निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर बचाव एवं राहत की तैयारी करने में मदद मिल सकती है।
राहत से आगे बढ़कर ‘पहले चेतावनी’ पर फोकस
चीन के इस कदम का सबसे अहम पहलू यह है कि प्राकृतिक आपदा के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय खतरे की पहले पहचान और समय पर चेतावनी देने वाली व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
हिमालयी क्षेत्र में मौसम और जलवायु से जुड़े जोखिमों के बीच नेपाल के लिए यह सहयोग आने वाले समय में कितना प्रभावी साबित होता है, यह लगातार मिलने वाली निगरानी सूचनाओं और उनके आधार पर की जाने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
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