सीतामढ़ी: नेपाल में लगातार बारिश और जलप्रलय के बीच उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा एक बार फिर सिर उठाने लगा है। सीमा पार के जलग्रहण क्षेत्रों में पानी बढ़ने का असर बिहार की नदियों पर पड़ रहा है। कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि के बीच प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
सीतामढ़ी और शिवहर जैसे सीमावर्ती जिलों में हालात पर खास नजर रखी जा रही है। वजह साफ है—इन जिलों की कई नदियों का रिश्ता सीधे नेपाल से जुड़ा है। नेपाल में बारिश तेज होते ही यहां नदी का मिजाज तेजी से बदल सकता है।
बारिश बिहार में कम, चिंता नेपाल के पानी की
इस बार सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि बिहार में खतरा सिर्फ स्थानीय बारिश से नहीं, बल्कि नेपाल के कैचमेंट एरिया से आने वाले पानी से भी पैदा हो रहा है। यही वजह है कि प्रशासन नदी के जलस्तर के साथ-साथ तटबंधों और निचले इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सीतामढ़ी के डीएम तनय सुलतानिया ने संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेकर अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। तटबंधों की निगरानी, ऊंचे स्थानों की पहचान और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी पर जोर दिया गया है।
पहले तैयारी, फिर पानी का इंतजार
प्रशासन की रणनीति साफ है—बाढ़ आने के बाद भागदौड़ करने के बजाय पहले से इंतजाम पूरे किए जाएं। संभावित प्रभावित आबादी के लिए सुरक्षित ठिकानों की पहचान, सामुदायिक रसोई की तैयारी और राहत-बचाव संसाधनों को तैयार रखने पर जोर दिया जा रहा है।
मौसम विभाग ने भी 30 अगस्त को सीतामढ़ी और शिवहर समेत उत्तर-मध्य बिहार के कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। ऐसे में नेपाल से आने वाले पानी और स्थानीय मौसम, दोनों पर नजर रखना जरूरी हो गया है।
सीमा पार का संकट, बिहार में बढ़ती बेचैनी
नेपाल में जारी तबाही ने बिहार के लिए यह संदेश फिर साफ कर दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में होने वाली भारी बारिश और अचानक आने वाली बाढ़ का असर सीमा पार तक पहुंच सकता है। नेपाल में भोटेकोशी समेत कई नदियों में दोबारा जलस्तर बढ़ने की चेतावनी के बाद वहां भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
ऐसे में सीतामढ़ी और शिवहर के लिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—नेपाल से आने वाला पानी कितना बढ़ेगा और बिहार की नदियां उसे कितना संभाल पाएंगी? प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन आने वाले घंटों में नदी के जलस्तर और बारिश की स्थिति ही तय करेगी कि यह अलर्ट महज एहतियात रहता है या बाढ़ की नई चुनौती बनता है।
ये खबर भी पढ़े: 1,680 सीढ़ियां… कंधों पर जिंदगी, गया के गुरपा पहाड़ पर बिजली गिरी तो श्रद्धालु बने ‘रेस्क्यू टीम’!
