गया: अब गांव के बच्चे सिर्फ किताबों में सवाल नहीं ढूंढ रहे, बल्कि अपनी पढ़ाई की व्यवस्था पर भी सवाल करने लगे हैं। गया जिले के फतेहपुर प्रखंड की डुमरी चट्टी पंचायत के हनुमता गांव में सोमवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। स्कूल भवन की समस्या से परेशान छात्रों ने रास्ते में पंचायत के मुखिया को रोक लिया और सीधे सवाल कर दिया—“मुखिया जी, स्कूल भवन आखिर कब बनेगा?”
छात्रों ने कहा कि विद्यालय में महज दो कमरे हैं। बच्चों की संख्या के हिसाब से यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। ऐसे में पढ़ाई कैसे होगी और सभी बच्चे कहां बैठेंगे? छात्रों के बेबाक सवालों ने मुखिया को भी मौके पर रुककर जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया।
रास्ते में रुके मुखिया, बच्चों ने शुरू कर दी ‘जनता की अदालत’
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। छात्रों के सवाल सुनने के बाद मुखिया ने तत्काल विद्यालय के प्रिंसिपल को फोन लगाया। इसके बाद फोन पर ही स्कूल की व्यवस्था को लेकर सवाल-जवाब शुरू हो गया।
मुखिया ने विद्यालय प्रबंधन से पूछा कि आखिर अभिभावकों की बैठक क्यों नहीं कराई गई? उनका कहना था कि अगर पैरेंट मीटिंग में स्कूल भवन की समस्या सामने रखी जाती तो पंचायत स्तर से भी आवश्यक पहल की जा सकती थी।
उन्होंने शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन से अभिभावकों के साथ बैठक करने और स्कूल की समस्याओं को सामने रखने की बात कही।
‘पहले प्रस्ताव तो भेजिए’, मुखिया ने प्रिंसिपल को दिया निर्देश
स्कूल भवन की समस्या पर मुखिया ने प्रिंसिपल से कहा कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को लिखित प्रस्ताव भेजा जाए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए फंड का प्रावधान नहीं है क्या?
यानी बच्चों के एक सवाल ने स्कूल प्रबंधन और पंचायत के बीच उस मुद्दे को सामने ला दिया, जो लंबे समय से चर्चा से बाहर था।
भवन से आगे पढ़ाई पर भी सवाल
बात सिर्फ कमरों की कमी तक नहीं रुकी। मुखिया ने विद्यालय में पढ़ाई की स्थिति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की पढ़ाई को लेकर जवाब मांगा और व्यवस्था की वास्तविक स्थिति देखने की बात कही।
इस दौरान विद्यालय प्रबंधन के कामकाज और अभिभावकों के साथ संवाद को लेकर भी सवाल उठे।
वायरल वीडियो ने खींचा लोगों का ध्यान
पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में छात्र स्कूल भवन को लेकर मुखिया से सवाल करते नजर आ रहे हैं। घटना के बाद गांव में यह चर्चा का विषय बन गया है कि जब बच्चे खुद अपनी पढ़ाई की बुनियादी सुविधा के लिए सवाल पूछ रहे हैं तो जिम्मेदार विभाग इस समस्या का समाधान कब करेगा।
बच्चों का सवाल छोटा, लेकिन मुद्दा बड़ा
हनुमता गांव के इस स्कूल की कहानी सिर्फ दो कमरों की कमी तक सीमित नहीं है। यह सवाल उस व्यवस्था से भी है, जहां स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए खुद जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगने को मजबूर हो रहे हैं।
बच्चों ने सड़क पर कुछ मिनटों के लिए मुखिया को जरूर रोका, लेकिन उनका सवाल अब शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ा है—अगर स्कूल में कमरे ही पर्याप्त नहीं हैं तो बच्चों की पढ़ाई आखिर कैसे बेहतर होगी?
अब देखना होगा कि वायरल वीडियो और छात्रों की इस पहल के बाद स्कूल भवन के लिए सिर्फ आश्वासन मिलता है या वास्तव में निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम भी उठाया जाता है।
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