बगहा: वाल्मीकिनगर के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) क्षेत्र में एक दुर्लभ लॉन्ग-स्नाउटेड वाइन स्नेक (Ahaetulla longirostris) मिलने से वन्यजीव प्रेमियों में उत्सुकता बढ़ गई। सांप पावर हाउस के पास एक जाली में फंसा मिला, जिसके बाद उसका सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया गया।
यह प्रजाति अपने बेहद लंबे और नुकीले थूथन के कारण आसानी से पहचानी जाती है। इसकी खोज बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पहले भी वैज्ञानिक रूप से दर्ज की जा चुकी है।
जाली में फंसा था दुर्लभ सांप
जानकारी के मुताबिक, सांप 20 अगस्त को पावर हाउस के पास जाली में फंसा मिला था। सूचना मिलने पर स्नेक रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद सांप को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
लॉन्ग-स्नाउटेड वाइन स्नेक पेड़ों और झाड़ियों में रहने वाला पतला सांप है। इसकी लंबाई करीब चार फीट तक हो सकती है और इसका रंग हरा या भूरा-नारंगी दिखाई दे सकता है। इसका पेट अक्सर नारंगी रंग का होता है।
मुंह के आगे नहीं दिखते दांत, लेकिन पूरी कहानी अलग है
इस सांप की सबसे खास पहचान इसका लंबा थूथन और पेड़ों पर रहने की आदत है। यह वाइन स्नेक समूह से संबंधित है और इसके दांतों की बनावट अन्य सामान्य सांपों से अलग होती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे हल्के विष वाला माना जाता है और यह सामान्य परिस्थितियों में इंसानों के लिए गंभीर खतरा नहीं माना जाता।
बिहार में पहले भी वैज्ञानिक खोज बन चुका है
यह वही प्रजाति है जिसे वैज्ञानिकों ने 2021 में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के आसपास खोजा था। DNA और अन्य वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद इसे नई प्रजाति के रूप में Ahaetulla longirostris नाम दिया गया। बिहार और मेघालय इसके शुरुआती दर्ज स्थानों में शामिल रहे हैं।
जंगल के लिए क्यों खास है यह सांप?
ऐसे दुर्लभ जीवों की मौजूदगी वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की जैव-विविधता को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की प्रजातियों की मौजूदगी जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के अध्ययन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
खास बात: सांप दिखने पर उसे पकड़ने या छेड़ने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना देना ही सुरक्षित तरीका है।
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