भागलपुर: भागलपुर में विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद गंगा में जहाजों का परिचालन ही दोनों छोर के लोगों की आवाजाही का मुख्य जरिया बना हुआ है। हालांकि, गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर और घाट तक पहुंचने वाले संपर्क पथ पर पानी व कटाव की स्थिति ने अब इस वैकल्पिक सफर को भी कठिन बना दिया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने बियाडा घाट से जाह्नवी चौक घाट के बीच चलने वाले जहाजों पर बाइक ले जाने पर 7 अक्टूबर तक पूरी तरह रोक लगा दी है।
इस पाबंदी का सबसे सीधा और गंभीर असर उन लोगों पर पड़ा है जिनकी रोजी-रोटी और दैनिक कामकाज पूरी तरह बाइक पर ही निर्भर है। सुबह और शाम शहर में दूध आपूर्ति करने वाले विक्रेताओं का नेटवर्क पूरी तरह चरमरा गया है। वहीं, नवगछिया और दियारा इलाके से केला तथा हरी सब्जियां मंडी तक पहुंचाने वाले किसानों के सामने फसल सड़ने का खतरा मंडराने लगा है। पशुपालकों और रोजमर्रा की मजदूरी या नौकरी के लिए आने-जाने वाले लोगों को भी घाट के दोनों ओर पैदल ही लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।
धरातली हालात जानने के लिए बियाडा घाट से जाह्नवी चौक घाट तक किए गए सफर के दौरान यात्रियों के लिए सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिला। करीब एक घंटे के इस लंबे जलमार्ग सफर में जहाज के खुले डेक पर शेड की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कड़कड़ाती धूप के बीच यात्री किसी तरह तिरपाल या कपड़ों का सहारा लेकर सफर पूरा करने को मजबूर दिखे। खासकर छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों के लिए यह सफर काफी कष्टदायक साबित हो रहा है।
विक्रमशिला सेतु के बंद रहने से यह जलमार्ग सिर्फ एक सामान्य परिवहन सेवा न रहकर दोनों तटों के जनजीवन की जीवनरेखा बन चुका है। ऐसे में बढ़ता जलस्तर, घाटों पर जलजमाव, जहाज पर नागरिक सुविधाओं की कमी और बाइक परिचालन पर रोक ने आम लोगों की रोजमर्रा की चुनौतियों को काफी बढ़ा दिया है। 7 अक्टूबर तक इस स्थिति के बने रहने की संभावना को देखते हुए स्थानीय लोगों में यह चिंता गहराई हुई है कि अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रही इस बड़ी आबादी के लिए प्रशासन की ओर से अब तक कोई वैकल्पिक इंतजाम क्यों नहीं किया गया है।
ये खबर भी पढ़े: सीतामढ़ी के श्मशान में अंधविश्वास का खौफनाक तांडव; बच्चों को पैर पकड़कर हवा में घुमाता और जमीन पर पटकता दिखा कथित तांत्रिक!