जमुई: जिलाधिकारी के सख्त निर्देश के बाद जमुई जिला प्रशासन अवैध क्लिनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। सोमवार की देर रात उप विकास आयुक्त सह अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) सौरव कुमार ने एसीएमओ डॉ. अरविंद कुमार, बीडीओ और अंचलाधिकारी (CO) के साथ खैरा रोड स्थित नीमारंग के पास संचालित रंजीत मंडल के ‘जी.पी.ई. इमरजेंसी हॉस्पिटल’ पर अचानक छापेमारी की।
अचानक हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई से क्लिनिक कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जांच टीम ने देर रात 10 बजे तक करीब तीन घंटे तक पूरे अस्पताल का चप्पा-चप्पा खंगाला और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की।
जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले खुलासे:
- डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ नदारद: निरीक्षण के दौरान अस्पताल में एक भी प्रमाणित डॉक्टर या रजिस्टर्ड नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं मिला। पूरे अस्पताल का संचालन फर्जी और झोलाछाप कर्मियों के भरोसे ही चल रहा था।
- पर्चे पर डॉक्टरों के नाम फर्जी: अस्पताल के पर्चे पर फर्जी तरीके से तीन-तीन डॉक्टरों के नाम लिखे पाए गए, जो मौके पर गायब थे।
- नाम में बड़ा झोलझाल: बोर्ड पर ‘जी पी फार्मा पॉली क्लिनिक’ लिखा मिला, जबकि मरीजों को दिए जा रहे पर्चे पर ‘जीपीई इमरजेंसी हॉस्पिटल’ अंकित था।
- एक्सपायर्ड रजिस्ट्रेशन व अवैध OT: अस्पताल का रजिस्ट्रेशन पिछले साल ही एक्सपायर हो चुका था। इसके बावजूद अवैध रूप से ऑपरेशन थिएटर (OT), पैथोलॉजी लैब और मेडिकल स्टोर चलाया जा रहा था।
- सिजेरियन ऑपरेशन के बाद भर्ती थे 4 मरीज: मौके पर सिजेरियन (ऑपरेशन) के बाद भर्ती 4 मरीज पाए गए, जिनसे पूछताछ की गई। इनमें से 1 मरीज जा चुका था, जबकि शेष 3 गंभीर मरीजों को तुरंत बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल जमुई में शिफ्ट कराया गया।
SDO सौरव कुमार का कड़ा रुख: ‘स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’
कार्रवाई के संबंध में SDO सौरव कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेशानुसार सदर अस्पताल के आसपास और जिले भर में संचालित सभी निजी क्लिनिकों की गहन जांच की जा रही है। खैरा रोड स्थित यह अस्पताल बिना किसी वैध दस्तावेज के एक मकान में अवैध रूप से चलता पाया गया, जिसके बाद इसे तत्काल प्रभाव से सील (Seal) कर दिया गया है।
सदर अस्पताल में 2 मौतों की जांच रिपोर्ट जल्द, व्यवस्था में सुधार जारी
हाल ही में सदर अस्पताल में दो प्रसूताओं की मौत के मामले पर दुख प्रकट करते हुए एसडीओ ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा गठित 2 सदस्यीय जांच कमेटी मामले की जांच कर रही है और जल्द ही रिपोर्ट सामने आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई बिना किसी पक्षपात के की जा रही है—चाहे वह आईएमए (IMA) से जुड़े डॉक्टर का क्लिनिक हो या कोई अन्य। प्रशासन सदर अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटा है, जहां आज भी हर महीने 500 से अधिक सुरक्षित प्रसव (Deliveries) कराए जा रहे हैं।