लखीसराय: सावन की तीसरी सोमवारी पर बिहार के लखीसराय में आस्था का महापर्व कुछ ही पलों में मातम में बदल गया। प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में जलाभिषेक के लिए उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सोमवार सुबह भगदड़ मच गई, जिसमें अब तक 7 महिलाओं की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 22 से अधिक श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। जिसमें 4 की हालत नाज़ुक बनी हुई है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

घटना अशोकधाम रेलवे स्टेशन से मंदिर जाने वाले मार्ग पर हुई, जहां देर रात से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक प्रशासनिक जानकारी के अनुसार रात में एक बिजली का खंभा गिर गया था। सुबह भीड़ बढ़ने के दौरान खंभे और तारों में करंट फैलने की आशंका के बीच अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे, जिससे बैरिकेडिंग टूट गई और देखते ही देखते भगदड़ जैसी भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई।

भगदड़ के दौरान कई महिलाएं और बुजुर्ग भीड़ के दबाव में गिर पड़े। पीछे से लगातार बढ़ती भीड़ के कारण दर्जनों लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और श्रद्धालु अपनों को तलाशते नजर आए। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका कोहराम से भर गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हुए घायलों को एंबुलेंस से लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल परिसर में भी बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग जुट गए। चिकित्सकों की टीम लगातार घायलों का इलाज कर रही है।

लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि सात लोगों की मौत की सूचना मिली है। प्रारंभिक जानकारी में बिजली का खंभा गिरने और लोगों के करंट की चपेट में आने की बात सामने आई है, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बनी। हालांकि घटना की वास्तविक वजह की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।

वहीं जिला पदाधिकारी ने बताया कि प्रशासनिक टीम तड़के साढ़े तीन बजे से ही मौके पर मौजूद थी। सुबह करीब साढ़े छह बजे अचानक श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी। इसी दौरान खेत की ओर लगी बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे, जिससे बड़ा हादसा हो गया।

आस्था के मेले में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सावन की सोमवारी पर हर वर्ष अशोक धाम में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी भारी भीड़ की संभावना पहले से थी, इसके बावजूद भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या के मुकाबले पर्याप्त निकासी मार्ग और सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। यदि भीड़ नियंत्रण और बिजली व्यवस्था पर पहले से विशेष निगरानी रखी जाती तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।

पांच महीने में दूसरी बड़ी मंदिर भगदड़
यह बिहार में पांच महीने के भीतर मंदिर परिसर या धार्मिक आयोजन से जुड़ी दूसरी बड़ी भगदड़ है। इससे पहले 31 मार्च को नालंदा जिले के मघड़ा शीतला मंदिर में चैत्र माह के अंतिम मंगलवार को दर्शन के दौरान भगदड़ मच गई थी। उस हादसे में 8 महिलाओं समेत 9 श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। लगातार दूसरी बड़ी घटना ने धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

मातम में बदली सोमवारी
जिस रास्ते से श्रद्धालु ‘बोल बम’ के जयकारे लगाते हुए बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे, वही रास्ता कुछ देर बाद चीखों और सिसकियों से गूंज उठा। परिजनों के सामने अपनों की मौत की खबर पहुंचते ही अस्पताल और घटनास्थल पर दर्दनाक दृश्य देखने को मिले। पूरे लखीसराय जिले में शोक की लहर है और लोग हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है और घायलों के बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा गया है।
न्यूज़ का अपडेट जारी है…
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