पटना: लंबे समय तक सदन और सोशल मीडिया की राजनीति तक सीमित रहने के आरोप झेल रहे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब सड़क की राजनीति के मैदान में उतरते दिखाई दे रहे हैं। सिवान छात्र आंदोलन और युवाओं के मुद्दों को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय जनता दल ने 19 अगस्त को पटना में राजभवन (लोकभवन) मार्च का ऐलान किया है। राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव की राजनीतिक वापसी और जनाधार बचाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
बांकीपुर उपचुनाव के बाद बदली रणनीति?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने बिहार की राजनीति में कई नए संकेत दिए। सबसे बड़ा झटका राजद को तब लगा जब विपक्षी वोटों का एक बड़ा हिस्सा जनसुराज की ओर जाता दिखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजद के पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक में भी सेंध लगी और इसका असर पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया।
यही वजह है कि अब तेजस्वी यादव युवाओं, छात्रों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।
Gen-Z की राजनीति को समझने की कोशिश
बिहार और झारखंड में हाल के छात्र आंदोलनों ने यह संकेत दिया है कि नई पीढ़ी सिर्फ चुनावी भाषण नहीं, बल्कि सड़क पर संघर्ष करने वाले नेतृत्व को भी महत्व दे रही है। भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों पर युवाओं की सक्रियता बढ़ी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव अब उसी युवा असंतोष को राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाकर राजद ने सीधे सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
राजभवन मार्च बनेगा शक्ति प्रदर्शन
19 अगस्त को राजद कार्यालय से शुरू होकर राजभवन तक प्रस्तावित मार्च को पार्टी बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है। इसके जरिए राजद यह संदेश देना चाहती है कि वह अभी भी बिहार में सबसे मजबूत विपक्ष है और जनसुराज जैसी नई राजनीतिक ताकतों को खुला मैदान नहीं छोड़ेगी।
जनसुराज की चुनौती से बढ़ी बेचैनी
प्रशांत किशोर की जनसुराज के उभार ने बिहार की विपक्षी राजनीति का समीकरण बदल दिया है। बांकीपुर उपचुनाव में मिले समर्थन ने यह संकेत दिया कि पारंपरिक राजनीतिक दलों के वोट बैंक में भी बदलाव की संभावना है।
ऐसे में राजद के सामने सिर्फ सत्तारूढ़ गठबंधन ही नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति में अपनी जगह बचाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
19 अगस्त पर टिकी निगाहें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 19 अगस्त का मार्च केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव की राजनीतिक सक्रियता, संगठन की ताकत और युवाओं के बीच उनकी स्वीकार्यता की भी परीक्षा होगा। अगर बड़ी संख्या में युवा और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरते हैं, तो यह राजद के लिए सकारात्मक संकेत माना जाएगा।