मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर में बाढ़ पीड़ितों के सब्र का बांध आखिरकार टूट ही गया। गायघाट प्रखंड में जब जदयू विधायक कोमल सिंह अपनी कथित ‘विकास यात्रा’ पर उतरीं, तो जनता का ऐसा रौद्र रूप देखने को मिला कि महोदया की सिट्टी-पिट्टी गुल हो गई। बाढ़ के दलदल में फंसे लोगों का गुस्सा इस कदर भड़का कि उन्होंने विधायक के काफिले को चारों तरफ से घेर लिया। हालात इतने खौफनाक थे कि कोमल सिंह को अपनी ही गाड़ी के अंदर दुबककर जान बचानी पड़ी। यदि मौके पर पुलिस फोर्स ने ढाल बनकर मोर्चा न संभाला होता, तो जनता का यह ज्वार किसी बड़ी अनहोनी को अंजाम दे देता!
महिलाओं के तीखे सवाल: कहाँ गई तुम्हारी ममता, ओ ‘गायघाट की बेटी’?
छह दिनों से पानी में डूबे घरों, उजड़े आशियानों और खुले आसमान के नीचे पॉलीथीन के सहारे जिंदगी काट रहे गरीबों के सब्र का इम्तिहान जब खत्म हुआ, तो महिलाओं का गुस्सा सीधे आसमान छूने लगा।
विधायक को घेरकर महिलाओं ने ऐसा तमाचा जड़ने वाले सवाल दागे कि गाड़ी का शीशा भी छोटा पड़ गया:
“चुनाव में हाथ जोड़कर खुद को ‘गायघाट की बेटी’ बताने वाली मैडम! आज जब हमारे बच्चे भूखे पेट सड़कों पर तड़प रहे हैं, तब तुम छह दिन बाद मुंह दिखाने क्यों आई हो? संकट के समय जनता को उसके हाल पर छोड़कर कौन सा राजधर्म निभाया जा रहा है?”
सिस्टम और जनप्रतिनिधियों के मुंह पर करारा तमाचा!
ग्रामीणों ने प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं के झूठे दावों की धज्जियां उड़ाते हुए सीधे शब्दों में चेतावनी दी है:
- भोजन-पानी का टोटा: छह दिन बीत जाने के बाद भी एक दाना राहत सामग्री या एक पॉलीथीन नसीब नहीं हुई है।
- कम्युनिटी किचन कागजों पर दफ़्न: भुखमरी के कगार पर खड़ी जनता के लिए कोई सामुदायिक रसोई शुरू नहीं की गई।
- सिर्फ कोरे जुमले: जनता अब विधायक के फोन घुमाने और अधिकारियों को निर्देश देने के नाटकों से तंग आ चुकी है—उन्हें आश्वासन नहीं, तत्काल मदद चाहिए।
राजनीतिक घराने की हनक पर जनता का भारी प्रहार!
यह कोई आम विरोध नहीं है। कोमल सिंह उस राजनीतिक रसूख वाले परिवार से आती हैं जहां उनके पिता (दिनेश प्रसाद सिंह) जदयू के ताकतवर एमएलसी हैं और माता (वीणा देवी) सांसद हैं। इतना बड़ा राजनीतिक बैकग्राउंड होने के बावजूद यदि किसी विधायक को जनता के आक्रोश से बचने के लिए गाड़ी में दुबकना पड़े, तो यह साफ संदेश है—अब आपदा की आड़ में जनता को बेवकूफ बनाने का खेल खत्म हो चुका है। पब्लिक जाग चुकी है और कुर्सी के अहंकार को तहस-नहस करना अच्छी तरह जानती है!
कांटा पिरौंछा दक्षिणी पंचायत में है गंभीर स्थिति
जानकारी के मुताबिक, गायघाट प्रखंड की कांटा पिरौंछा दक्षिणी पंचायत इन दिनों प्रलयकारी बाढ़ की चपेट में है। गांवों के अंदर घरों में पानी घुस चुका है, मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट चुका है और दर्जनों परिवार सड़कों के किनारे पॉलीथीन का आशियाना बनाकर खुले आसमान के नीचे गुजर-बसर करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में बाढ़ आए छह से सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो प्रशासन की ओर से पर्याप्त राहत सामग्री मुहैया कराई गई है और न ही भोजन का कोई इंतजाम किया गया है।
पुलिस ने टाली बड़ी अनहोनी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध इतना आक्रामक था कि विधायक को काफी देर तक अपनी गाड़ी के अंदर ही बैठना पड़ा। जैसे ही काफिले ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, आक्रोशित लोगों ने गाड़ी को घेर लिया और तत्काल राहत सामग्री बांटने की मांग पर अड़ गए।
हालात बेकाबू होते देख मौके पर मौजूद पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत सुरक्षा घेरा बनाया और विधायक को सुरक्षित वहां से निकाला। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को जल्द से जल्द राहत कार्य तेज करने का आश्वासन दिया।
मौके से डीएम को लगाया फोन
बढ़ते विरोध और जनता की बदहाली को देखते हुए विधायक कोमल सिंह ने तत्काल जिला पदाधिकारी (DM) से फोन पर बातचीत की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) शुरू करने और युद्ध स्तर पर राहत सामग्री का वितरण सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
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