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Bihar: शराबबंदी हटेगी या जारी रहेगी? JDU में ही दो सुर—प्रवक्ता बोले ‘भस्म हो जाएगा’, सांसद ने कहा ‘समीक्षा जरूरी!

पटना: बिहार की करीब एक दशक पुरानी शराबबंदी नीति पर अब सत्ता पक्ष के भीतर ही सुर अलग-अलग सुनाई देने...

पटना: बिहार की करीब एक दशक पुरानी शराबबंदी नीति पर अब सत्ता पक्ष के भीतर ही सुर अलग-अलग सुनाई देने लगे हैं। राष्ट्रीय आर्थिक शोध संस्था NCAER की रिपोर्ट में शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित बिक्री और आबकारी कर व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। सबसे दिलचस्प तस्वीर जेडीयू के भीतर दिखाई दे रही है—एक तरफ पार्टी प्रवक्ता शराबबंदी को लेकर बेहद सख्त रुख दिखा रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के सांसद इसके नियंत्रित तरीके से समीक्षा की बात कर रहे हैं।

एक ही पार्टी, दो बयान और शराबबंदी पर बढ़ी बहस

जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने शराबबंदी को लेकर किसी भी तरह की ढील की संभावना को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू रहेगी और इसे छूने वालों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी।

उनका तर्क है कि शराबबंदी ने खासकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव किया है और यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामाजिक सुधार के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

लेकिन पार्टी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर का रुख इससे अलग नजर आया। उन्होंने शराबबंदी को पूरी तरह हटाने के बजाय इसकी समीक्षा और नियंत्रित तरीके से लागू करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि यह मानना मुश्किल है कि शराबबंदी के बावजूद कहीं भी शराब उपलब्ध नहीं है, इसलिए व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की समीक्षा जरूरी है।

यहीं से जेडीयू के भीतर शराबबंदी को लेकर मतभेद की तस्वीर सामने आती है।

NCAER रिपोर्ट ने छेड़ दी नई राजनीतिक बहस

पूरे विवाद की शुरुआत NCAER की उस रिपोर्ट से हुई, जिसमें बिहार में पूर्ण शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित बिक्री शुरू करने और आबकारी कर व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि ऐसा होने पर राज्य के अपने राजस्व में करीब 14 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।

रिपोर्ट में शराबबंदी के बाद अवैध शराब की तस्करी, दूसरे नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और कानून लागू कराने में आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है।

अब सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार सरकार इस रिपोर्ट के आर्थिक और सामाजिक पहलुओं की समीक्षा करेगी या शराबबंदी की मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहेगी।

मंत्री ने तस्करी पर और कड़ा रुख दिखाया

इसी बहस के बीच मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने भी सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

उन्होंने यहां तक कहा कि जिस ब्रांड की शराब बिहार में पकड़ी जाएगी, संबंधित कंपनी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के इस बयान से साफ है कि सरकार के एक हिस्से का फोकस शराबबंदी हटाने के बजाय अवैध शराब और तस्करी पर शिकंजा कसने पर है।

मांझी और RJD भी मैदान में

शराबबंदी पर चल रही बहस में विपक्ष और सहयोगी दल भी अपनी राय रख रहे हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी पहले भी शराबबंदी कानून की समीक्षा और इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा चुके हैं। NCAER रिपोर्ट के बाद उन्होंने गुजरात मॉडल की तर्ज पर नीति पर विचार की बात कही है।

वहीं आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने सरकार पर निशाना साधते हुए शराब की तस्करी रोकने में नाकामी का आरोप लगाया। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों से शराब की कथित तस्करी पर सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।

BJP ने फैसला कैबिनेट पर छोड़ा

बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि शोध संस्थानों की रिपोर्टों की समीक्षा सरकार करती है और शराबबंदी भी सामूहिक निर्णय का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और आगे क्या फैसला होगा, यह कैबिनेट के स्तर पर तय किया जाएगा।

असली सवाल: शराबबंदी रहेगी या बदलेगा मॉडल?

बिहार में शराबबंदी सिर्फ कानून नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक और सामाजिक नीति का हिस्सा रही है। ऐसे में NCAER की रिपोर्ट ने आर्थिक राजस्व, अवैध तस्करी, सामाजिक प्रभाव और कानून के क्रियान्वयन को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

फिलहाल तस्वीर साफ है—सरकार के भीतर शराबबंदी हटाने को लेकर कोई सहमति नहीं है। एक तरफ सख्ती जारी रखने की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ समीक्षा और नियंत्रित व्यवस्था की आवाज भी उठ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में सरकार इस बहस को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखती है या शराबबंदी की नीति की नए सिरे से समीक्षा करती है।

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Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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