पटना: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। पटना के लोक भवन में आयोजित ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए।
मुख्यमंत्री ने मंच से स्वीकार किया कि बिहार में लोग चोरी-छिपे शराब का सेवन कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जगहों पर शराबबंदी का असर साफ दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि आजकल बिहार के लोग देवघर, बनारस और कुशीनगर जैसे स्थानों पर ज्यादा जा रहे हैं, जहां शराबबंदी लागू नहीं है। इशारों-इशारों में उन्होंने यह भी माना कि कई लोग इन यात्राओं का इस्तेमाल शराब पीने के लिए कर रहे हैं।
इस बयान ने न सिर्फ शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सरकार की निगरानी और क्रियान्वयन व्यवस्था पर भी बहस छेड़ दी है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि 2016 में लागू शराबबंदी का फैसला समाज सुधार के लिए लिया गया था, जिससे महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने माना कि इस फैसले से राज्य को राजस्व का नुकसान हुआ, लेकिन सामाजिक लाभ ज्यादा महत्वपूर्ण रहा।
कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्य सचिव और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे। सभी ने नशा मुक्त बिहार का संकल्प लिया और युवाओं से जनजागरण अभियान में भाग लेने की अपील की गई।
हालांकि, मुख्यमंत्री के इस स्वीकारोक्ति वाले बयान के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब खुद मुख्यमंत्री मान रहे हैं कि लोग चोरी-छिपे शराब पी रहे हैं, तो क्या शराबबंदी कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है?
बिहार की सियासत में यह बयान आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: EO मर्डर में नया ट्विस्ट, 50 लाख की डिमांड… नहीं देने पर विधायक ने कराई हत्या? पत्नी के आरोप से मचा हड़कंप!