पटना: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का एक अलग रूप देखने को मिला। उन्होंने आदिवासी समाज के पारंपरिक वाद्ययंत्र तुम्दा को गले में लटकाकर बजाया। इस दौरान उनके साथ आदिवासी समाज के कई नेता और कार्यकर्ता भी नजर आए।
तेजस्वी यादव ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और विरासत को देश की साझा धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ अपनी पहचान और अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष करता रहा है।
गले में तुम्दा, हाथों में ताल
कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी यादव पारंपरिक अंदाज में तुम्दा बजाते नजर आए। तस्वीरों में वह तुम्दा को गले में लटकाकर अन्य लोगों के साथ ताल मिलाते दिखाई दिए। उनका यह अंदाज राजनीतिक गतिविधियों से अलग होने के कारण चर्चा में रहा।
तुम्दा आदिवासी समाज का पारंपरिक वाद्ययंत्र है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों और पारंपरिक कार्यक्रमों में किया जाता है। तेजस्वी का इसे बजाना आदिवासी संस्कृति के प्रति सम्मान के तौर पर देखा गया।
बोले- जल, जंगल और जमीन की विरासत की रक्षा जरूरी
तेजस्वी यादव ने कहा कि आदिवासी समाज देश की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने लोगों से आदिवासी समाज की पहचान, अधिकारों और हितों की रक्षा का संकल्प लेने की अपील की।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आदिवासी समाज को जल, जंगल, जमीन और जीवन की विरासत का संरक्षक बताते हुए विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दीं।
तस्वीर ने खींचा लोगों का ध्यान
विश्व आदिवासी दिवस पर तेजस्वी यादव का तुम्दा बजाते हुए सामने आया अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों और सभाओं में भाषण देते नजर आने वाले तेजस्वी इस बार पारंपरिक वाद्ययंत्र के साथ दिखाई दिए।
इस मौके पर उन्होंने आदिवासी समाज की संस्कृति और अधिकारों के संरक्षण की बात भी कही। वहीं, बिहार की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर वह लगातार सरकार पर निशाना साधते रहे हैं।
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