लखीसराय: लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर परिसर में श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब नगर परिषद सभापति अरविंद पासवान ने खुलेआम बैठक का बहिष्कार कर दिया। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यशैली और मंदिर ट्रस्ट की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंगलवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला प्रशासन के अधिकारी, अशोक धाम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक का उद्देश्य श्रावणी मेला के दौरान सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की समीक्षा करना था, लेकिन शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण हो गया।
“जनप्रतिनिधि की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं” — अरविंद पासवान
नगर परिषद सभापति अरविंद पासवान ने प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि बैठक के उपस्थिति रजिस्टर में उनके पद का उल्लेख तक नहीं किया गया। इसे उन्होंने न सिर्फ व्यक्तिगत अपमान, बल्कि जनप्रतिनिधि के पद की गरिमा के खिलाफ बताया।
उन्होंने कहा कि अशोक धाम मंदिर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-1 में आता है, ऐसे में इस तरह की अहम बैठक में नगर परिषद सभापति की अनदेखी गंभीर लापरवाही है।
ट्रस्ट पर भी उठे सवाल
अरविंद पासवान ने अशोक धाम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में नगर परिषद अध्यक्ष को पदेन सदस्य तक नहीं बनाया गया है, जो स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का स्पष्ट उदाहरण है।
हालांकि उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में शामिल न किए जाने पर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रशासनिक बैठकों में इस तरह की उपेक्षा अस्वीकार्य है।
बैठक में बनी रही असहज स्थिति
सभापति के बहिष्कार के बाद कुछ समय तक बैठक स्थल पर असहज स्थिति बनी रही। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि कुछ देर के लिए बैठक की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।
हालांकि बाद में प्रशासन ने पूर्व निर्धारित एजेंडे के अनुसार बैठक को आगे बढ़ाया, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक कंट्रोल, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर चर्चा की गई।
बड़ा सवाल: क्या जनप्रतिनिधियों की अनदेखी हो रही है?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज कर रहे हैं?
श्रावणी मेला जैसे बड़े आयोजन से पहले इस तरह का विवाद सामने आना प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर जिला प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से क्या सफाई सामने आती है।
श्रावणी मेला से पहले लखीसराय में उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। जनप्रतिनिधि बनाम प्रशासन की यह टकराव की स्थिति मेला व्यवस्था पर भी असर डाल सकती है।
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