पटना: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार द्वारा मुआवजा और सरकारी नौकरी की घोषणा के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक मामले में सरकार इतनी संवेदनशील है, तो दूसरे पीड़ित परिवारों के लिए वही मानदंड क्यों नहीं अपनाए जा रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने कहा कि न्याय का पैमाना व्यक्ति देखकर नहीं बदलना चाहिए। यदि भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी दी जा रही है, तो अन्य पीड़ित परिवारों को भी समान अधिकार मिलना चाहिए।
क्या सरकार दबाव में फैसला ले रही है?
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यशैली कई सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने पूछा कि क्या राहत और मुआवजे का फैसला किसी तय नीति के तहत हो रहा है या फिर जनदबाव और राजनीतिक परिस्थितियों को देखकर निर्णय लिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे मामलों में उसका आधिकारिक मानदंड क्या है।
सिर्फ चेक बांटने से न्याय नहीं मिलता
जन सुराज प्रमुख ने कहा कि आर्थिक सहायता देना समाधान नहीं है। असली सवाल यह है कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई हुई।
उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में प्रशासनिक या पुलिस स्तर पर चूक हुई है, तो दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। केवल मुआवजा घोषित कर देना न्याय नहीं कहलाता।
बंटी यादव मामले का भी उठाया मुद्दा
प्रशांत किशोर ने बंटी यादव के परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को सभी पीड़ित परिवारों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि न्याय चयनात्मक नहीं होना चाहिए और हर परिवार को समान अवसर तथा समान संवेदनशीलता मिलनी चाहिए।
सरकार पर विपक्षी दबाव बढ़ा
भरत तिवारी मामले में न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद विपक्ष और सामाजिक संगठनों की ओर से सरकार पर सवालों का दबाव बढ़ता दिख रहा है। प्रशांत किशोर के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या राज्य में पीड़ितों के लिए कोई समान और पारदर्शी नीति है।
हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों और सवालों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ये खबर भी पढ़े: National News: आत्मनिर्भर भारत का मंत्र, विकसित राष्ट्र का संकल्प, लाल किले से पीएम मोदी का 13वां संबोधन!