रांची: यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं था, बल्कि रिश्तों को महसूस कराने वाला एक पल था। नगड़ी स्थित वृद्धाश्रम में शुक्रवार को उस समय हर आंख नम हो गई, जब एक बुजुर्ग ने उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री से मासूम सवाल किया—“मेरा कोई है का?”
क्षण भर के लिए सन्नाटा छा गया… लेकिन अगले ही पल उपायुक्त ने उनका हाथ थाम लिया और कहा—“हम सब आपके ही हैं।”
इस एक वाक्य ने जैसे पूरे माहौल को बदल दिया—सरकारी दौरा, एक आत्मीय मुलाकात में बदल गया।
उपायुक्त ने सिर्फ औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि हर बुजुर्ग के पास जाकर उनका हाल जाना। जो नीचे नहीं आ सके, उनके कमरों तक खुद पहुंचे। किसी ने अपनी बीमारी बताई, किसी ने अकेलेपन की बात—और हर बात को गंभीरता से सुना गया।
इस दौरान एक बुजुर्ग महिला ने भजन गाया, तो माहौल में भक्ति और अपनापन घुल गया। वहीं एक बुजुर्ग की डूरंड कप फुटबॉल मैच देखने की इच्छा पर उपायुक्त ने तुरंत व्यवस्था कराने का निर्देश दे दिया—यह दर्शाता है कि संवेदनाएं सिर्फ सुनने तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने की पहल भी हुई।
पिछली मुलाकात की याद रखते हुए उपायुक्त इस बार मिठाइयां भी साथ लाए थे। उन्होंने अपने हाथों से बुजुर्गों को मिठाई खिलाई—और लंबे समय बाद उनके चेहरों पर सच्ची मुस्कान लौट आई।
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक भोजन, स्वच्छता और रहने की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, वर्षा जल निकासी, पेयजल, हरियाली और रोशनी जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
यह मुलाकात एक संदेश छोड़ गई—प्रशासन सिर्फ व्यवस्था नहीं, बल्कि संवेदनाओं का भी नाम है… और कभी-कभी एक अपनापन भरा जवाब ही सबसे बड़ी राहत बन जाता है।
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