पटना: बिहार के मॉडल स्कूलों के रंग और नाम बदलने के फैसले को लेकर सियासत तेज हो गई है। सरकार के इस कदम पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, वहीं शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के बयान ने विवाद को और हवा दे दी है।
मॉडल स्कूलों को भगवा रंग में रंगने और कुछ स्कूलों का नाम ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ करने के फैसले पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि भगवा रंग खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस रंग से मां सरस्वती प्रसन्न होंगी और बिहार में समृद्धि आएगी।
मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए स्कूलों के भगवाकरण का आरोप लगाया। विपक्षी दलों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बजाय सरकार रंग और नाम बदलने पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
वहीं जेडीयू और बीजेपी नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है और विपक्ष बेवजह मुद्दा बना रहा है।
बीजेपी विधायक नीरज कुमार बबलू ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि भगवा रंग से किसी को परेशानी क्यों होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार स्कूलों में सुधार और विकास के लिए काम कर रही है।
दूसरी ओर AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि सरकारी स्कूल जनता के पैसे से बनते हैं और किसी भी हालत में शिक्षा संस्थानों का राजनीतिक रंगकरण नहीं होना चाहिए।
फिलहाल बिहार में स्कूलों के रंग और नाम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शिक्षा बनाम राजनीति की बहस में बदल गया है।
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