गोपालगंज: एक तरफ जहां सरकारें और पुलिस प्रशासन आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने और तकनीकी व्यवस्थाओं जैसे जीरो FIR के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं गोपालगंज में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. अपने 28 वर्षीय युवा बेटे की सकुशल बरामदगी के लिए एक लाचार पिता पिछले दो महीनों से पुलिस थानों के चक्कर काटने को मजबूर है. महाराष्ट्र के पुणे और बिहार के गोपालगंज जिले क़े स्थानीय भोरे थाने से केवल आश्वासन और निराशा मिलने के बाद अब वह थक-हारकर बिहार के पुलिस महानिदेशक का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है पूरा मामला..
प्राप्त जानकारी के मुताबिक बताया जाता है की गोपालगंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र क़े रामपुर गांव निवासी
रामशिष भगत का 28 वर्षीय पुत्र संदीप कुमार सिंह अपने जिवका पार्जन को लेकर आज से तीन माह पूर्व महाराष्ट्र के पुणे स्थित मुंढवा (मुंडी बाड़ी) इलाके में रोजगार को लेकर गया हुआ था.
जहाँ वह अपने ही गांव के हरिन्द्र राम के कमरे पर रहकर एक ठेकेदार के अधीन इलेक्ट्रिशियन का काम करता था. बीते 17 मई 2026 की शाम 4:00 बजे तलेगांव रेलवे स्टेशन (पुणे) से मुंबई जाने के लिए उसने ट्रेन पकड़ी थी.
वह न तो मुंबई पहुंचा और न ही वापस कमरे पर आया. उसी दिन से उसका मोबाइल नंबर लगातार बंद आ रहा है।
दो थानों के बीच पिसा लाचार पिता: न पुणे में सुनवाई, न भोरे पुलिस ने दर्ज की Zero FIR ..
वही संदीप के अचानक गायब हो जाने के बाद इधर परिजनों के होश उड़ गए है. लापता के पिता ने रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों पर काफी खोजबीन के बाद पुणे के तलेगांव दाभाड़े पुलिस स्टेशन पंहुच बेटे की बरामदी को लेकर न्याय की गुहार लगाई.लेकिन जिम्मेवारों ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया की स्थानीय थाने जाओ. थक हारकर पुणे मुंबई से पीड़ित अपने थाने पहुंचा
ताकि यहां उसे न्याय मिल जाए. यहां भी निराशा हाथ लगी. पीड़ित ने पुलिस महानिदेशक को भेजे पत्र में इस बात का जिक्र किया है कि पिछले दो महीनों से वह लगातार थाने के चक्कर काट रहा है.लेकिन पुलिस एक जीरो FIR तक दर्ज करने को तैयार नहीं है. लंबे समय से मोबाइल बंद होने और कोई सुराग न मिलने के कारण परिजनो का सब्र टूट रहा है.
DGP से लगाई बेटे की बरामदगी की गुहार…
स्थानीय पुलिस के रवैये से पूरी तरह हताश होकर पीड़ित पिता ने अब उच्च अधिकारियों का रुख किया है. उन्होंने DGP बिहार को लिखित आवेदन देकर बेटे की बरामदी को लेकर गुहार लगाई है.अब देखने वाली बात यह होगी कि DGP बिहार को गुहार लगाने के बाद इस लाचार पिता को न्याय मिलता है या खाकी का यह ढुलमुल रवैया यूं ही बरकरार रहता है।