पटना: बिहार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS विक्रेताओं की समस्याओं को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर राशन विक्रेताओं की आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने PDS विक्रेताओं को गुजरात की तर्ज पर कम से कम ₹30 हजार मासिक निश्चित मानदेय देने से लेकर महीनों से लंबित कमीशन के भुगतान तक कई मुद्दे उठाए हैं।
तेजस्वी ने कहा कि PDS विक्रेता कठिन परिस्थितियों में लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके मुताबिक महंगाई, कमीशन भुगतान में देरी, तकनीकी समस्याओं और प्रशासनिक दबाव के कारण विक्रेताओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है।
₹30 हजार मानदेय की मांग से बढ़ी सियासी हलचल
तेजस्वी यादव ने सरकार से गुजरात की तर्ज पर बिहार के PDS विक्रेताओं को न्यूनतम ₹30,000 प्रतिमाह निश्चित मानदेय देने की मांग की है।
उनका तर्क है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में केवल कमीशन पर निर्भर रहने वाले विक्रेताओं के सामने कई तरह की परेशानियां हैं। ऐसे में निश्चित मानदेय की व्यवस्था उनके लिए आर्थिक स्थिरता का आधार बन सकती है।
अनुकंपा नियुक्ति की समय-सीमा खत्म करने की मांग
तेजस्वी ने झारखंड की तर्ज पर अनुकंपा नियुक्ति की निर्धारित समय-सीमा समाप्त करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि पात्र आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए।
6 महीने से एक साल तक के कमीशन का मुद्दा
PDS विक्रेताओं के लंबित कमीशन को लेकर भी तेजस्वी ने सरकार को घेरा है। पत्र में उन्होंने छह महीने से एक वर्ष तक के लंबित कमीशन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की है।
उनके अनुसार कमीशन भुगतान में देरी का सीधा असर विक्रेताओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
₹47 अतिरिक्त कमीशन का भी उठाया सवाल
तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनाव से पहले PDS विक्रेताओं के कमीशन में ₹47 की बढ़ोतरी की घोषणा का भी जिक्र किया। उन्होंने मांग की कि यदि बढ़ी हुई राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है तो इसे तत्काल लागू करते हुए बकाया राशि भी जारी की जाए।
हालांकि जून 2026 में बिहार राज्य खाद्य निगम की ओर से दिसंबर 2025 के लंबित अतिरिक्त डीलर कमीशन के लिए 35 जिलों को ₹47 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान हेतु राशि आवंटित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसलिए वर्तमान में किस अवधि और किस जिले का कितना भुगतान लंबित है, यह विभागीय आंकड़ों से स्पष्ट होना बाकी है।
BSFC गोदामों पर भी उठे गंभीर सवाल
तेजस्वी ने बिहार राज्य खाद्य निगम यानी BSFC के गोदामों में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितता और घटतौली की शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।
इसके साथ ही माप-तौल, ई-POS मशीन, सर्वर और अन्य तकनीकी समस्याओं का रियल टाइम समाधान करने की मांग की गई है, ताकि तकनीकी गड़बड़ियों का नुकसान PDS विक्रेताओं या राशन लाभुकों को न उठाना पड़े।
सिर्फ कमीशन नहीं, प्रशासनिक दबाव का भी मुद्दा
तेजस्वी ने PDS व्यवस्था से जुड़े अनावश्यक प्रशासनिक दबाव और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने तथा जिला और प्रखंड स्तर पर प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र बनाने की मांग की है।
उन्होंने सरकार, विभागीय अधिकारियों और फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के बीच नियमित त्रिपक्षीय बैठक कराने की बात भी कही है, ताकि समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
अब नजर सरकार के जवाब पर
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री से इन मांगों पर शीघ्र, सकारात्मक और समयबद्ध निर्णय लेने का आग्रह किया है। ऐसे में अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं।
PDS विक्रेताओं की मांगों को लेकर पिछले दिनों राज्य में धरना-प्रदर्शन की बात भी सामने आई थी, जिसमें ₹30 हजार मानदेय और लंबित कमीशन का मुद्दा प्रमुख था।
यानी तेजस्वी के पत्र ने राशन दुकानदारों के मानदेय और कमीशन के पुराने मुद्दे को एक बार फिर बिहार की सियासत के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।