पटना: भारत में पोस्टकार्ड की ऐतिहासिक शुरुआत के अवसर पर ‘प्लेनेट पटना फाउंडेशन’ द्वारा एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डुमरांव प्लेस स्थित ‘प्लेनेट पटना आर्काइव्स एंड म्यूजियम’ में आयोजित हुआ, जिसका विषय था— “मीन्स ऑफ कम्युनिकेशन थ्रू द एजेस इन इंडिया एंड पोस्ट ऑफिस”।
इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बिहार पोस्टल सर्कल (पटना) के चीफ पोस्टमास्टर जनरल मोजफ्फर उद्दीन अब्दाली थे। उन्होंने मानव सभ्यता के प्रारंभिक दौर से लेकर आधुनिक डाक व्यवस्था तक के विकास को विस्तार से समझाया।
अब्दाली ने बताया कि संचार की शुरुआत आदिमानव के इशारों, मौखिक परंपराओं और गुफा चित्रों से हुई। समय के साथ व्यापार और शासन की जरूरतों ने संदेशवाहकों की संगठित व्यवस्था को जन्म दिया। उन्होंने टेलीग्राफ सेवा का उल्लेख करते हुए बताया कि यह सीमित प्रतीकों के माध्यम से संदेश भेजने की प्रणाली थी। साथ ही भारत की पहली डाक टिकट ‘सिंधे डॉक’ का जिक्र करते हुए भारतीय डाक के ऐतिहासिक विकास को रेखांकित किया।
उन्होंने आधुनिक भारतीय डाक की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज देशभर में करीब 1.65 लाख पोस्ट ऑफिस कार्यरत हैं और लाखों लोग डाक सेवाओं के साथ-साथ बैंकिंग, आधार और पासपोर्ट जैसी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। डाक विभाग वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
कोविड-19 महामारी के दौरान डाक विभाग ने घर-घर जाकर आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) के जरिए बड़ी संख्या में लेन-देन सुनिश्चित किए, जिससे लोगों को राहत मिली।
अब्दाली ने कहा, “पोस्ट ऑफिस कभी अपने काम का ढिंढोरा नहीं पीटता; यह खामोशी से देश और समाज को जोड़ने का कार्य करता रहता है।”
कार्यक्रम में शोधकर्ताओं, छात्रों, इतिहासकारों और आम नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और संचार के बदलते स्वरूप व डाक विभाग के भविष्य को लेकर प्रश्न पूछे।
इस अवसर पर ‘प्लेनेट पटना’ के फाउंडर आदित्य जालान और डायरेक्टर डॉ. अज़फर अहमद सहित शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि 2025 में स्थापित ‘प्लेनेट पटना फाउंडेशन’ एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए व्याख्यान, हेरिटेज वॉक और संग्रहालय गतिविधियों का आयोजन करती है।
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ब्यूरो हेड महुआ न्यूज़
बिहार /झारखण्ड