पटना: नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और फर्जीवाड़े से अर्जित काले धन को रियल एस्टेट में खपाने का बड़ा खुलासा आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की जांच में हुआ है। जांच एजेंसी को मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर सम्राट और उसके भाई अश्विनी के ठिकानों से फतुहा और बख्तियारपुर इलाके में खरीदी गई करोड़ों रुपये की जमीनों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। प्रारंभिक जांच में इन संपत्तियों का बाजार मूल्य 20 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।
ईओयू सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान 5 से 6 बड़े भूखंडों के रजिस्टर्ड डीड और एग्रीमेंट बरामद किए गए हैं। इनमें कुछ जमीनों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ की प्रक्रिया जारी थी। अब जांच एजेंसी निबंधन कार्यालयों से रिकॉर्ड जुटाकर संपत्तियों के वास्तविक मूल्य, भुगतान के स्रोत और बैंक खातों के जरिए हुए लेन-देन की मनी ट्रेल खंगाल रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा माफिया गिरोह ने फतुहा-बख्तियारपुर फोरलेन कॉरिडोर में बड़े पैमाने पर निवेश किया था। ईओयू की विशेष टीम संपत्तियों को जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में जुटी है।
स्टे रद्द कराने कोर्ट जाएगी EOU
मुख्य आरोपी डॉ. रविशंकर सम्राट ने एमबीबीएस पूरक परीक्षा का हवाला देकर और उसकी पत्नी मधुप्रिया ने गर्भावस्था के आधार पर अदालत से गिरफ्तारी पर रोक हासिल की थी। हालांकि ईओयू का दावा है कि राहत अवधि के दौरान भी रविशंकर ने हवलदार इंस्ट्रक्टर परीक्षा में धांधली कराने और नीट-2027 के लिए एक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र से करार करने जैसी गतिविधियां जारी रखीं।
इन्हीं नए साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसी सोमवार को अदालत में आवेदन देकर रविशंकर को मिली राहत समाप्त कराने की मांग करेगी। साथ ही रविशंकर और अश्विनी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी भी की जा रही है।
प्रति सीट 12 से 30 लाख रुपये वसूलता था गिरोह
ईओयू की जांच में खुलासा हुआ है कि यह सिंडिकेट प्रतियोगी परीक्षाओं में सीट दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से 12 लाख से 30 लाख रुपये तक वसूलता था। गिरोह से जुड़े दो अहम आरोपी अब भी फरार हैं। इनमें बेतिया जीएमसीएच का एक मेडिकल छात्र और लखीसराय का बायोमेट्रिक ठेकेदार प्रमोद यादव शामिल हैं। दोनों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
अब तक की जांच में क्या मिला
जांच एजेंसी के अनुसार नीट परीक्षा और री-नीट परीक्षा में बायोमेट्रिक मिसमैच, स्कॉलर बैठाने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रवेश दिलाने के मामलों की जांच के दौरान इस बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में पीएमसीएच के कुछ छात्रों की भूमिका भी सामने आई है, जहां कथित तौर पर परीक्षा से पहले बैठकों के जरिए अभ्यर्थियों और स्कॉलरों की डील तय की जाती थी।
हाल ही में ईओयू ने मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर सम्राट समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके ठिकानों से नकदी, खाली उत्तर पुस्तिकाएं, ब्लैंक चेक, विभिन्न परीक्षाओं के एडमिट कार्ड और फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बरामद किए गए थे।
मामले में अब तक 27 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ईओयू का मानना है कि पूछताछ और वित्तीय जांच के बाद परीक्षा माफिया के नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुला-से हो सकते हैं।