मधेपुरा: जिले के ग्वालपाड़ा प्रखंड अंतर्गत पड़ोकिया गांव में शनिवार को एक अजीबोगरीब मामला सामने आया, जिसने कुछ देर के लिए एक मजदूर परिवार को “अरबपति” होने का अहसास करा दिया। लेकिन यह खुशी महज कुछ मिनटों की निकली।
गांव निवासी अनिल दास की 17 वर्षीय पुत्री रूपा कुमारी के बैंक खाते में अचानक ₹7,59,69,51,951.16 (करीब 759 करोड़ रुपये) बैलेंस दिखने लगा। यह आंकड़ा उस समय सामने आया जब रूपा ने आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS) के जरिए 800 रुपये की निकासी की।
लेनदेन सफल रहा, लेकिन सीएसपी से मिली रसीद में दर्ज शेष राशि ने पूरे परिवार को हैरत में डाल दिया। देखते ही देखते गांव में चर्चा फैल गई— “मजदूर की बेटी के खाते में अरबों रुपये!”
परिवार ने जब राशि निकालने की कोशिश की, तो सच्चाई सामने आ गई। खाते से कोई अतिरिक्त रकम नहीं निकली।
इस पर बैंक से संपर्क किया गया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बिहारीगंज शाखा के सहायक प्रबंधक अनिमेष अंशु ने बताया कि हाल ही में बैंक के सॉफ्टवेयर सिस्टम में अपडेट किया गया है, जिसके कारण कुछ खातों में गलत बैलेंस प्रदर्शित हो रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह तकनीकी त्रुटि है और अगले दो-तीन दिनों में स्वतः ठीक हो जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो इस तरह की गड़बड़ी से लोगों में भ्रम और अविश्वास दोनों बढ़ेगा।