शेखपुरा की सड़कों पर बुधवार को ‘नारी शक्ति’ को लेकर सियासी तापमान अचानक बढ़ गया। भारतीय जनता पार्टी की ओर से निकाले गए आक्रोश मार्च ने न सिर्फ शहर का माहौल गरमा दिया, बल्कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर राजनीति भी तेज हो गई। इस पूरे प्रदर्शन की अगुवाई बीजेपी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्रेयसी सिंह ने की, जिन्होंने इंडी गठबंधन और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।

प्रेस वार्ता के दौरान श्रेयसी सिंह ने कहा कि लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्षी दलों ने देश की हर महिला का अपमान किया है। उनके अनुसार, यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के खिलाफ सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडी गठबंधन ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को रोककर महिलाओं के साथ धोखा किया है।

श्रेयसी सिंह ने अपने बयान में कई प्रमुख महिला नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दल अपने परिवार की महिलाओं को तो आगे बढ़ाते हैं, लेकिन आम महिलाओं के अधिकारों की बात आने पर पीछे हट जाते हैं। उन्होंने राबड़ी देवी, मीसा भारती, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और डिंपल यादव का उदाहरण देते हुए परिवारवाद की राजनीति पर सवाल उठाए।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह प्रयास बाधित हुआ है। श्रेयसी सिंह के अनुसार, इंडी गठबंधन ने पहले 2023 में महिला आरक्षण बिल का समर्थन केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया, लेकिन अब उनका असली चेहरा सामने आ गया है।

इस बीच, शहर में निकला आक्रोश मार्च भी चर्चा का केंद्र बना रहा। जिलाध्यक्ष रेशमा भारती के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया। चिलचिलाती धूप और उमस के बावजूद महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। बाजिदपुर स्थित पार्टी कार्यालय से शुरू हुआ यह मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ पेट्रोल पंप तक पहुंचा।

मार्च के दौरान महिलाओं ने इंडी गठबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और ‘नारी सम्मान’ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। कार्यकर्ताओं ने श्रेयसी सिंह पर फूलों की बारिश कर उनका स्वागत किया, जिससे पूरे कार्यक्रम का माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया।

श्रेयसी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं का हक छीनने वालों को देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो महिलाओं को वास्तविक सम्मान और अवसर देने का काम कर रही है।

इस आक्रोश मार्च के जरिए बीजेपी ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि वह ‘नारी शक्ति’ के मुद्दे को लेकर पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाएगी। वहीं, इस घटनाक्रम ने शेखपुरा सहित पूरे बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है कि महिलाओं के अधिकारों पर असली राजनीति कौन कर रहा है और कौन केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है।
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