खूंटी: झारखंड के खूंटी से आई एक तस्वीर ने विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जहां एक तरफ शहरों में आधुनिक सुविधाओं की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ गांवों में आज भी लोग सड़क और पुल के अभाव में अपनी जिंदगी दांव पर लगाने को मजबूर हैं।
अड़की प्रखंड के सावमरांगबेड़ा गांव में प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी। बारिश के कारण उफनती करकरी नदी रास्ते में बाधा बनी, लेकिन मजबूरी के आगे ग्रामीणों ने हार नहीं मानी।
एंबुलेंस पहुंची नहीं, ग्रामीण बने सहारा
गांव में सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस मौके तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद महिला के पति और ग्रामीणों ने उसे कंधे पर बैठाकर तेज बहाव वाली नदी पार कराई और किसी तरह अड़की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में महिला का सुरक्षित प्रसव हुआ। जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
हर साल बारिश में कट जाता है गांव का संपर्क
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। हर बरसात में करकरी नदी गांव के लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। मरीज, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा परेशान होते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार सड़क और पुल की मांग की गई, लेकिन वर्षों बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
विकास के दावों पर बड़ा सवाल
एक ओर सरकार गांव-गांव सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर खूंटी की यह तस्वीर बताती है कि कई इलाकों में बुनियादी सुविधाएं अब भी लोगों से दूर हैं।
आज ग्रामीणों की हिम्मत से एक मां और बच्चे की जान बच गई, लेकिन सवाल यह है—क्या हर बार किसी जिंदगी को बचाने के लिए ग्रामीणों को खुद ही ‘सिस्टम’ बनना पड़ेगा?