चाईबासा: झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में मलेरिया अब सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पश्चिमी सिंहभूम जिले में ब्रेन मलेरिया का खतरा मंडराने लगा है, जहां 86 गांवों को मलेरिया रेड जोन घोषित कर हाई अलर्ट पर रखा गया है।
सबसे डराने वाली बात यह है कि संक्रमण कई लोगों के शरीर में बिना किसी साफ लक्षण के फैल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में ऐसे सैकड़ों मरीज मिले हैं, जिन्हें बीमारी का पता तक नहीं था। यही छिपा हुआ संक्रमण अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा रहा है।
घर-घर पहुंचा स्वास्थ्य विभाग, फिर भी बढ़ रहे मामले
मिशन उदय 2.0 अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर जांच कर रही हैं। अब तक 21,833 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें 700 लोगों में पीएफ मलेरिया संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें 352 मरीज ऐसे हैं, जिनमें बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखे।
वहीं, छह दिनों के विशेष सर्वे में 1,143 नए मलेरिया संक्रमित मरीज मिलने से हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गोइलकेरा और मनोहरपुर बने मलेरिया के हॉटस्पॉट
जिले के गोइलकेरा और मनोहरपुर प्रखंड सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में सामने आए हैं। गोइलकेरा में जांच के दौरान बड़ी संख्या में पीएफ मलेरिया के मरीज मिले हैं, जबकि मनोहरपुर के कई गांवों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें संक्रमित मरीजों को दवा उपलब्ध करा रही हैं और ग्रामीणों को मच्छरों से बचाव के उपायों की जानकारी दे रही हैं।
लापरवाही पड़ी भारी तो बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, पीएफ मलेरिया समय पर इलाज नहीं मिलने पर गंभीर रूप ले सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, ठंड लगना, कमजोरी या शरीर दर्द जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या समय रहते इस ‘खामोश संक्रमण’ पर काबू पाया जा सकेगा, या फिर ग्रामीण इलाकों में मलेरिया का संकट और गहराएगा?