देवघर: आज के डिजिटल दौर में जहां त्योहारों की मिठास धीरे-धीरे ऑनलाइन संदेशों तक सिमटती जा रही है, वहीं देवघर में एक ऐसी पहल शुरू हुई है जो रिश्तों में फिर से अपनापन और भावनाओं की गर्माहट भरने की कोशिश कर रही है।
इस बार रक्षाबंधन 2026 पर बहनों की राखी बाजार से नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों के बच्चों के रचनात्मक हाथों से तैयार होगी। देवघर में डाक विभाग और शिक्षा विभाग ने मिलकर एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसका मकसद सिर्फ राखी बनवाना नहीं, बल्कि बच्चों की प्रतिभा को पहचान देना और रिश्तों की अहमियत समझाना है।
नन्हे हाथ बनाएंगे प्यार की डोर
इस पहल के तहत सरकारी स्कूलों के बच्चे अपने हाथों से राखियां तैयार करेंगे। इन राखियों में उनकी कल्पना, मेहनत और भावनाएं जुड़ी होंगी। चयनित खूबसूरत राखियों को डाक विभाग प्रदर्शित करेगा, जबकि बाकी राखियां बच्चों के बताए पते पर उनके भाइयों तक डाक के जरिए पहुंचाई जाएंगी।
यानी इस बार किसी भाई की कलाई पर सिर्फ धागा नहीं, बल्कि उसकी बहन के हाथों से बनी मेहनत और प्यार की निशानी बंधेगी।
बच्चों की कला को मिलेगा सम्मान
डाक अधीक्षक एसके मिश्रा ने बताया कि यह पहल पहली बार शुरू की गई है। बच्चों को राखी बनाने की सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी और सबसे सुंदर राखी बनाने वाले बच्चों को डाक विभाग सम्मानित भी करेगा।
उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते दौर में बच्चों को अपनी संस्कृति और पारिवारिक रिश्तों से जोड़ना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
एक राखी, कई भावनाएं
शिक्षकों का कहना है कि इस पहल से बच्चों की रचनात्मक क्षमता बढ़ेगी और वे रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के महत्व को करीब से समझ पाएंगे। वहीं बच्चों में भी इसे लेकर काफी उत्साह है।
अब देवघर की ये छोटी सी पहल एक बड़ा संदेश दे रही है—रिश्ते खरीदे नहीं जाते, उन्हें प्यार और भावनाओं से बनाया जाता है।