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Bihar: न घर बचा, न सहारा… कोसी ने छीन लिया ग्रामीणों का आशियाना!

सुपौल: कोसी नदी का कटाव एक बार फिर तबाही मचाने लगा है। सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड अंतर्गत कोसी बांध...

सुपौल: कोसी नदी का कटाव एक बार फिर तबाही मचाने लगा है। सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड अंतर्गत कोसी बांध के भीतर स्थित दुवियाही पंचायत के बेला गोठ गांव में नदी का कहर लगातार जारी है। पिछले 15 दिनों से हो रहे भीषण कटाव के कारण अब तक 30 से अधिक परिवारों के घर नदी में विलीन हो चुके हैं, जबकि कई अन्य घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है।

कटाव की मार झेल रहे परिवारों के सामने अब रहने और जीवन बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई विस्थापित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से अब तक राहत और बचाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है।

ग्रामीणों के अनुसार बेला घाट पर वार्ड संख्या 6 और वार्ड संख्या 7 के लोगों की आवाजाही के लिए एक भी सरकारी नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है। मजबूरी में लोगों को अपने घर का सामान सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए निजी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसके लिए उन्हें 3 हजार से 5 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त परेशानी बन गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि कटाव से प्रभावित होने के बाद भी उन्हें अब तक पॉलीथिन शीट, राहत सामग्री या अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है। कई परिवार अपना घर गंवाने के बाद भी खुले में दिन काट रहे हैं।

लोगों का आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद जांच अधिकारी गांव तक नहीं पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी पार करने की समस्या के कारण अधिकारी मौके पर जांच करने से बच रहे हैं, जिससे प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता मिलने में देरी हो रही है।

स्वास्थ्य सुविधाएं भी संकट में

कटाव प्रभावित बेला गोठ में स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों के मुताबिक नाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया है। कई बार मजबूरी में घर पर ही प्रसव कराने जैसी स्थिति पैदा हो रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि वार्ड संख्या 6 में पहले करीब 50 से 60 परिवार रहते थे, लेकिन लगातार कटाव के कारण अधिकांश परिवारों का आशियाना उजड़ चुका है। अब बचे हुए घरों पर भी नदी की तेज धारा का खतरा बना हुआ है।

गांव के पूर्वी हिस्से में वार्ड संख्या 7 और पश्चिमी हिस्से में वार्ड संख्या 6 के बीच से नदी बह रही है, लेकिन दोनों वार्डों के लोगों की सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से कोई स्थायी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

गंभीर स्थिति को देखते हुए वार्ड सदस्य रामकुमार मंडल, पूर्व वार्ड सदस्य शोभा देवी, वार्ड पंच बम भोला मंडल, समाजसेवी लालदेव मंडल, रामचंद्र मंडल, कमल मंडल, रामविलास मंडल और कंचन देवी सहित कई ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल राहत की मांग की है।

ग्रामीणों ने बेला घाट पर कम से कम एक सरकारी नाव उपलब्ध कराने, कटाव पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री देने और जल्द मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।

अधिकारी ने कही जांच की बात

राजस्व कर्मचारी आनंद कुमार गुप्ता ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से कटाव प्रभावित परिवारों की सूची उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि दो दिनों के भीतर स्थल पर जाकर जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

वहीं अंचल अधिकारी सुशीला कुमारी ने कहा कि कटाव प्रभावित क्षेत्र की जांच के लिए राजस्व कर्मचारी को भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद पात्र परिवारों को सरकारी प्रावधान के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

फिलहाल बेला गोठ गांव के लोगों की नजर प्रशासन की मदद पर टिकी है। कोसी की तेज धारा के बीच ग्रामीण अपने आशियाने और जीवन बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

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अख्तरुल इस्लाम, सुपौल

चंदन कुमार

Author at mahuaanews.com
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