राँची: झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज झारखंड मंत्रालय में भारतीय विदेश सेवा (2010 बैच) के वरिष्ठ अधिकारी श्री मोहम्मद शाहिद आलम एवं श्री सुशील प्रसाद ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुलाकात के दौरान राज्य की विकास यात्रा, निवेश के नए अवसरों और झारखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में झारखंड सरकार द्वारा वर्तमान में संचालित प्रमुख विकासात्मक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री और आईएफएस अधिकारियों के बीच राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और आर्थिक तंत्र को मजबूत करने की संभावनाओं पर गंभीर मंथन हुआ। राज्य सरकार की नई औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति के तहत खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल और कपड़ा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेशकों को विशेष वित्तीय रियायतें, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और भूमि आवंटन में प्राथमिकता दी जा रही है ताकि निवेश को धरातल पर उतारा जा सके।
झारखंड से बड़ी संख्या में श्रमिक और पेशेवर दूसरे देशों या राज्यों में जाते हैं। मुख्यमंत्री ने उनके हितों की रक्षा, सुरक्षित प्रवासन और बेहतर अवसरों के लिए अंतरराष्ट्रीय ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप’ के महत्व पर बल दिया। इसके जरिए प्रवासी नागरिकों को वैश्विक स्तर पर बेहतर कानूनी व सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी। इस नीति को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार प्रवासी सहायता केंद्र (Migrant Assistance Centres) और समर्पित हेल्पलाइन के जरिए संकट में फंसे झारखंडी मूल के श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी और कानूनी मदद सुनिश्चित कर रही है।
झारखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और समृद्ध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। बैठक में राज्य की वन्यजीव पर्यटन संभावनाओं को भुनाने पर चर्चा की गई। वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों और अभ्यारण्यों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए आकर्षित बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी। इसके लिए राज्य की पर्यटन और इको-टूरिज्म नीति (Eco-Tourism Policy) के तहत निजी-सार्वजनिक भागीदारी (PPP) मॉडल पर अभ्यारण्यों में कैंपिंग साइट्स और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सके।
झारखंड के युवाओं को वैश्विक स्तर के रोजगार के अनुकूल बनाने के लिए शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में विदेशी संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके तहत युवाओं को आधुनिक तकनीकी और भाषाई प्रशिक्षण देने की योजना है।
दुनियाभर में रह रहे झारखंड और भारतीय मूल के प्रवासियों को राज्य के विकास से जोड़ने की मुहिम पर बातचीत हुई। मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रवासी समुदाय का अनुभव, निवेश और तकनीक झारखंड की तरक्की में एक बड़ा उत्प्रेरक साबित हो सकते हैं।
मुलाकात के अंत में अधिकारियों ने झारखंड की वर्तमान प्रशासनिक शासन व्यवस्था तथा राज्य की अब तक की विकास यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण अनुभवों को साझा किया। मुख्यमंत्री सोरेन ने उम्मीद जताई कि भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों के वैश्विक अनुभव का लाभ झारखंड के नीतिगत लक्ष्यों को समय पर हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा।
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