सहरसा: नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के निलंबन को लेकर सहरसा नगर निगम में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। निलंबन के विरोध में पार्षदों और पार्षद प्रतिनिधियों ने लगातार दूसरे दिन भी नगर निगम कार्यालय में तालाबंदी कर अपना आक्रोश जाहिर किया। जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर कार्रवाई पर सवाल उठाए और राज्य सरकार से नगर आयुक्त के निलंबन के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे पार्षदों का कहना है कि प्रभात कुमार झा के कार्यकाल में शहर की कई बुनियादी समस्याओं को दूर करने की दिशा में काम हुआ। उनके मुताबिक, शहर की स्वच्छता व्यवस्था, जलजमाव की समस्या, सड़क निर्माण और नाला निर्माण सहित कई विकास योजनाओं को गति मिली थी। ऐसे में नगर आयुक्त के निलंबन से नगर निगम के विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
दूसरे दिन भी निगम कार्यालय में तालाबंदी
नगर आयुक्त के निलंबन के बाद शुरू हुआ विरोध अब लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों ने निगम कार्यालय में तालाबंदी कर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नगर निगम शहर के विकास और आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था है। ऐसे में यहां कामकाज प्रभावित होने से आम लोगों को भी परेशानी हो सकती है।
पार्षदों ने मांग की कि निलंबन के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए और पूरे मामले को उचित तरीके से देखा जाए। उनका कहना है कि किसी अधिकारी पर कार्रवाई का असर केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शहर में चल रही विकास योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
कार्रवाई के बाद विकास कार्यों को लेकर चिंता
प्रदर्शन कर रहे जनप्रतिनिधियों ने प्रभात कुमार झा के कार्यकाल में हुए कार्यों का हवाला देते हुए कहा कि शहर में सफाई, जलनिकासी, सड़क और नाला निर्माण जैसे मुद्दों पर काम आगे बढ़ा था। उनका दावा है कि नगर आयुक्त के निलंबन से इन योजनाओं की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
वहीं, नगर आयुक्त के निलंबन से जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई और उसके पीछे बताए गए आरोपों को लेकर भी चर्चा जारी है। ऐसे में एक तरफ कार्रवाई को लेकर जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया का सवाल है, तो दूसरी तरफ पार्षदों का विरोध और पुनर्विचार की मांग सामने आ रही है।
कामना सिंह और सुमन भारती ने रखी अपनी बात
प्रदर्शन के दौरान वार्ड संख्या 20 की पार्षद कामना सिंह और वार्ड संख्या 11 की पार्षद सुमन भारती ने भी अपनी बात रखी। दोनों जनप्रतिनिधियों ने नगर आयुक्त के निलंबन के विरोध में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग का समर्थन किया।
फिलहाल, लगातार दूसरे दिन की तालाबंदी के बाद सहरसा नगर निगम में विवाद और गहरा गया है। अब देखना होगा कि पार्षदों के विरोध और मांगों पर प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से क्या रुख अपनाया जाता है।
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सहरसा से विकास कुमार की रिपोर्ट…