लखीसराय: बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के उद्देश्य से बुधवार को चानन प्रखंड के मननपुर स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास निगम तथा संकल्प हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीमेन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत संपन्न हुआ। इसमें विद्यालय की छात्राओं को उनके अधिकारों, बाल विवाह के दुष्परिणामों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
कार्यक्रम की शुरुआत संगीत शिक्षिका जागृति राठौर ने गीत प्रस्तुत कर की। इसके बाद उपस्थित अधिकारियों और विशेषज्ञों ने छात्राओं को संबोधित करते हुए बेटियों की शिक्षा, उनके सर्वांगीण विकास और समाज में समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बेटियों के अस्तित्व, शिक्षा और अधिकारों की दी गई जानकारी
महिला सशक्तिकरण केंद्र के जिला मिशन समन्वयक प्रशांत कुमार ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के उद्देश्य और महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस योजना का संचालन बालिकाओं के अस्तित्व की रक्षा, उनके पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने छात्राओं से अपनी शिक्षा को प्राथमिकता देने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि बेटियों को बेहतर शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जब बालिकाओं को शिक्षा, सुरक्षा और आगे बढ़ने का समान अवसर मिलेगा, तभी समाज का समग्र विकास संभव हो सकेगा।

बाल विवाह सामाजिक कुरीति के साथ कानून का भी उल्लंघन
कार्यक्रम में बाल विवाह के मुद्दे पर विशेष रूप से चर्चा की गई। प्रशांत कुमार ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि कानून का उल्लंघन भी है। इसका प्रभाव बालिकाओं के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पड़ता है और उनके शिक्षा, विकास तथा तरक्की के अवसर प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा कि एक स्वस्थ, शिक्षित और विकसित समाज के निर्माण के लिए बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। बालिकाओं को अपने भविष्य, शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए, ताकि वे किसी भी तरह के सामाजिक दबाव के कारण अपने सपनों से समझौता न करें।

घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं को सखी वन स्टॉप सेंटर से मिलती है सहायता
कार्यक्रम में लैंगिक विशेषज्ञ किस्मत कुमारी ने महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा से प्रभावित किशोरियों और महिलाओं को सहायता एवं राहत उपलब्ध कराने के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर का संचालन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से एक ही छत के नीचे स्वास्थ्य संबंधी सहायता, सुरक्षा, मनोसामाजिक परामर्श, कानूनी सहायता और अल्पकालीन आश्रय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसका उद्देश्य संकट की स्थिति से गुजर रही महिलाओं और किशोरियों को जरूरी सहयोग उपलब्ध कराना है।
छात्राओं ने बाल विवाह और अपनी सुरक्षा को लेकर पूछे सवाल
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई छात्राओं ने बाल विवाह की रोकथाम, इसके कानूनी पहलुओं और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे। कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने उनके सवालों का जवाब देकर शंकाओं का समाधान किया। इस संवाद के माध्यम से छात्राओं को सामाजिक समस्याओं को समझने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के तरीकों की जानकारी मिली।
कार्यक्रम के दौरान छात्रा संजना कुमारी ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए उपस्थित छात्राओं को सामूहिक रूप से शपथ दिलाई। छात्राओं ने बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने और इस कुप्रथा को रोकने में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
अंत में विद्यालय के प्रधानाध्यापक हिमांशु शेखर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इसके साथ ही जागरूकता कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर लैंगिक विशेषज्ञ नवीन कुमार, शारीरिक शिक्षक दिनेश कुमार, शिक्षिका विनीता कुमारी, जूली कुमारी, प्रतिमा कुमारी सहित छात्राएं अर्चना, चांदनी, प्रीति, काजल, मीना कुमारी और विद्यालय की दर्जनों छात्राएं मौजूद रहीं।
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