पटना/नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लोकतंत्र, संविधान और मतदान के अधिकार को लेकर अपनी बात रखी।
रोहिणी आचार्य ने अपने संदेश में कहा कि लोकतंत्र में जनता की मर्जी चलनी चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और लोगों के मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों को उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर मुद्दा बताया। उनके बयान में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
SIR पर सियासी संग्राम, चुनाव आयोग निशाने पर
रोहिणी आचार्य ने SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मताधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। साथ ही, उन्होंने चुनाव आयोग पर केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया। ये उनके राजनीतिक बयान और आरोप हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, सुरक्षा व्यवस्था सख्त
दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP की ओर से आयोजित प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR में कथित अनियमितताओं के विरोध को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने और आवाजाही पर पाबंदियों की खबरें सामने आईं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया।
प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिलने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और प्रशासन की कार्रवाई के आधार की आधिकारिक पुष्टि संबंधित अधिकारियों के बयान से ही स्पष्ट होगी।
‘आर-पार की लड़ाई’ का संदेश
रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में संविधान और मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। उनके संदेश ने SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस को और धार दी है। अब सवाल यह है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया पर उठ रही आपत्तियों का जवाब चुनाव आयोग किस तरह देता है और विपक्ष की मांगों पर आगे क्या रुख अपनाता है।
SIR को लेकर राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच मतदाता सूची की पारदर्शिता, निष्पक्षता और नागरिकों के मतदान के अधिकार पर बहस तेज होती दिखाई दे रही है।
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