लखीसराय: सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए प्रशासन ने सोमवार को जमुई मोड़ से बायपास रोड तक हेलमेट जांच अभियान चलाया। सरकारी आंकड़ों में अभियान के दौरान 26 वाहनों पर चालान और ₹48,500 जुर्माना वसूले जाने की बात सामने आई है। लेकिन इसी अभियान से जुड़ा एक वीडियो अब सड़क सुरक्षा की पूरी कवायद पर सवाल खड़े कर रहा है।
वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा बाइक सवारों को रोकने के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति नजर आती है। कार्रवाई और जुर्माने के डर से कुछ बाइक सवार तेजी से आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अभियान का उद्देश्य हादसे रोकना है, अगर उसी दौरान किसी बाइक सवार का संतुलन बिगड़ जाए या दुर्घटना हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
सुरक्षा के नाम पर डर या जागरूकता?
हेलमेट पहनाना और यातायात नियमों का पालन कराना निश्चित रूप से जरूरी है। लेकिन क्या सड़क सुरक्षा अभियान का तरीका भी उतना ही सुरक्षित है?
अगर वाहन चालकों को रोकने की कोशिश में सड़क पर अचानक अफरातफरी की स्थिति बनती है और कोई बाइक सवार घबराकर तेज रफ्तार में निकलने की कोशिश करता है, तो दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।
फिर सवाल सिर्फ चालान का नहीं, जिंदगी की सुरक्षा का है।
चालान जरूरी, लेकिन तरीका भी सवालों के घेरे में
परिवहन विभाग के अनुसार अभियान का उद्देश्य दुर्घटनाओं में कमी लाना और वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना था। बिना हेलमेट और अधूरे कागजात वाले चालकों पर कार्रवाई भी की गई।
लेकिन जनहित का सवाल यह है कि क्या नियम लागू कराने के लिए ऐसा तरीका अपनाया जाना चाहिए, जिससे सड़क पर चल रहा व्यक्ति खुद को पुलिस से बचाने के लिए भागने लगे?
कानून का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
₹48,500 का जुर्माना बड़ी उपलब्धि या सुरक्षा का पैमाना?
26 वाहनों से ₹48,500 जुर्माना वसूला गया। आंकड़ा प्रशासन के लिए कार्रवाई की सफलता का संकेत हो सकता है, लेकिन सड़क सुरक्षा की असली सफलता तब मानी जाएगी जब लोग डर से नहीं, अपनी सुरक्षा समझकर हेलमेट पहनें।
सवाल यह भी है कि अभियान के दौरान कितने लोगों को वास्तव में जागरूक किया गया और कितने लोग सिर्फ चालान के डर से नियम मानने को मजबूर हुए?
प्रशासन से सीधे सवाल
- क्या वाहन रोकने की प्रक्रिया के दौरान सड़क पर सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया गया?
- बाइक सवार को रोकने के दौरान यदि वह घबराकर गिर जाए या किसी अन्य वाहन से टकरा जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
- क्या हेलमेट अभियान का उद्देश्य जागरूकता है या सिर्फ चालान और जुर्माना?
- क्या पुलिसकर्मियों को सुरक्षित तरीके से वाहन जांच करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और व्यवस्था दी गई है?
- क्या अभियान के दौरान किसी संभावित हादसे को रोकने के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत लगाए गए थे?
सड़क सुरक्षा में ‘सुरक्षित तरीका’ भी जरूरी
हेलमेट जांच होनी चाहिए, यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए और बिना दस्तावेज या बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों को दंडित किया जाना भी कानून का हिस्सा है।
लेकिन सड़क सुरक्षा अभियान का पहला सिद्धांत ही सुरक्षा है।
अगर नियम लागू कराने की प्रक्रिया में ही किसी की जान खतरे में पड़ने की स्थिति बनती है, तो प्रशासन को अपनी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना होगा।
क्योंकि ₹2,000 या ₹5,000 का चालान दोबारा भरा जा सकता है, लेकिन किसी हादसे में गई जान वापस नहीं आती।
अब सवाल लखीसराय प्रशासन से है—सड़क सुरक्षा के नाम पर चलाए जा रहे ऐसे अभियानों में नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित करेगा?
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