लखीसराय: बिहार में विकास को रफ्तार देने के उद्देश्य से निकाली गई समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लखीसराय जिले को 326 करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात देकर विकास की नई इबारत लिखने का संकेत दिया। इस दौरान उन्होंने 118 करोड़ रुपये की लागत से 117 योजनाओं का उद्घाटन किया, जबकि 208 करोड़ रुपये की लागत से 144 योजनाओं का शिलान्यास किया।

यह कार्यक्रम केवल औपचारिक उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मुख्यमंत्री ने खुद मौके पर जाकर योजनाओं की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव रहा कजरा सोलर पावर प्लांट, जो बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री ने प्लांट के यूडी मॉडल और कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर हाईब्रिड एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझा। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि इस परियोजना का पहला चरण पूरी तरह से तैयार हो चुका है, जिसमें 185 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन और 282 मेगावाट आवर बैटरी स्टोरेज की क्षमता शामिल है।

दूसरे चरण में 116 मेगावाट सौर ऊर्जा और 241 मेगावाट आवर स्टोरेज क्षमता पर काम तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को “बेहतरीन और भविष्य उन्मुख” बताते हुए कहा कि यह न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए ताकि राज्य को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री द्वारा जिन योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया, वे केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। इन योजनाओं में सड़क निर्माण, शिक्षा संस्थानों का विकास, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, सिंचाई परियोजनाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य जिले के हर वर्ग तक विकास की पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है—ऐसा समग्र विकास मॉडल तैयार करना जिसमें गांव और शहर के बीच की दूरी कम हो और हर व्यक्ति को बेहतर सुविधाएं मिलें।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 4,840 जीविका स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 123 करोड़ 80 लाख रुपये का सांकेतिक चेक प्रदान किया। यह कदम महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जीविका दीदियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं की बदौलत वे आत्मनिर्भर बन पाई हैं और अब अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने कार्यों को और आगे बढ़ाएं और समाज में अपनी पहचान मजबूत करें। उन्होंने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण के बिना राज्य का विकास अधूरा है। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री ने योजनाओं की जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश की।शिक्षा, खेल, कृषि, उद्योग, सहकारिता, अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण और कला-संस्कृति विभाग के स्टॉलों में प्रदर्शित योजनाओं ने यह दिखाया कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से बातचीत कर उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में बताया और कहा कि वे मेहनत से पढ़ाई करें और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएं। समृद्धि यात्रा के दौरान आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने “सात निश्चय-2” और “सात निश्चय-3” योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि स्वीकृत योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए और उनकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके लिए उद्योगों को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार में उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को विशेष आर्थिक पैकेज दिया जा रहा है, जिससे राज्य में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। इसके साथ ही स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से सक्षम बनाना जरूरी है ताकि वे बदलते समय के साथ खुद को तैयार कर सकें।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में “सात निश्चय-3” कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य राज्य के लोगों के दैनिक जीवन को आसान बनाना है। इस कार्यक्रम के तहत बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए ताकि राज्य को विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल किया जा सके।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा समेत कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इनकी मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार विकास योजनाओं को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसे जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए सभी स्तरों पर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। लखीसराय में आयोजित यह कार्यक्रम केवल योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राज्य सरकार की दीर्घकालिक विकास रणनीति का प्रतिबिंब भी है।

ऊर्जा के क्षेत्र में कजरा सोलर पावर प्लांट, महिलाओं के लिए जीविका योजना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और बुनियादी ढांचे के विकास की पहल—ये सभी मिलकर बिहार को एक नई दिशा देने की कोशिश का हिस्सा हैं। समृद्धि यात्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर किए गए कार्यों से होता है। यदि इन योजनाओं का क्रियान्वयन तय समय सीमा में और प्रभावी तरीके से किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में लखीसराय ही नहीं, बल्कि पूरा बिहार विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

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