रांची: झारखंड की ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद की शुरुआत हुई है। राज्य सरकार ने महिला उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके छोटे कारोबार को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए ‘झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम’ की शुरुआत की है।
इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने झारखंड मंत्रालय स्थित प्रोजेक्ट भवन में किया। यह कार्यक्रम IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क (IIMCIP), झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से चलाया जाएगा।
150 महिला उद्यमियों को मिलेगा तीन साल तक सहारा
तीन वर्षीय इस कार्यक्रम के पहले चरण में झारखंड की 150 महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण सूक्ष्म और नैनो उद्यमों का चयन किया जाएगा।
चयनित महिलाओं को सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की मदद, तकनीकी सहयोग और बाजार से जोड़ने की सुविधा भी दी जाएगी।
अब गांव की महिलाएं बनाएंगी ब्रांड
इस योजना के तहत महिला उद्यमियों को—बिजनेस मूल्यांकन, विशेषज्ञ मेंटरिंग, क्षमता विकास प्रशिक्षण, डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ाव, ई-कॉमर्स सुविधा, ब्रांडिंग, वित्तीय संस्थानों से संपर्क, कारोबार विस्तार की रणनीति जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
झारखंड सिर्फ खनिजों से नहीं, हुनर से भी पहचाना जाएगा’
कार्यक्रम में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यहां की महिलाएं मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास के बल पर बड़े स्तर की उद्यमी बन सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ 150 उद्यमों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में ऐसा मजबूत तंत्र तैयार करना है, जिससे आने वाले समय में हजारों महिला उद्यमियों को फायदा मिल सके।
1.54 लाख से ज्यादा उद्यमों को जोड़ने की तैयारी
सरकार की योजना है कि भविष्य में JSLPS से जुड़े 1.54 लाख से अधिक महिला उद्यमों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण, तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए।
इसके लिए रांची में एक केंद्रीय हब और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पांच क्षेत्रीय केंद्र बनाए जाएंगे, ताकि गांव तक मदद पहुंच सके।
सखी सिल्क से बदलेगी भगैया सिल्क की पहचान
कार्यक्रम में सखी सिल्क वेब पोर्टल की भी शुरुआत की गई। इसके जरिए गोड्डा और दुमका क्षेत्र के भगैया सिल्क बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सीधे बाजार से जोड़ा जाएगा।
अब तक भगैया सिल्क को अक्सर भागलपुर सिल्क के नाम से पहचान मिलती थी, लेकिन जीआई टैग मिलने के बाद झारखंड के इस पारंपरिक शिल्प को अपनी अलग पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।
गांव से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचेगा महिला हुनर
झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम को राज्य में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अगर यह मॉडल सफल होता है तो गांवों में चल रहे छोटे कारोबार न सिर्फ मजबूत होंगे, बल्कि झारखंड की महिलाएं अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा सकेंगी।
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